कार्यक्रम में बोलते हुए वक्ता दीपांकर अरोन
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मैं अपनी जिंदगी का डिजाइनर हूं। मुझे इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि बेहतर सोचें, आगे सोचें, समाधान सोचें और खुश रहें, ये कहना था दीपांकर अरोन का। अरोन भारत सरकार के सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवाकर के अपर आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। वे फिक्की की ओर से बृहस्पतिवार को आयोजि एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने ये भी कहा की सिर्फ नियमित नौकरी करने से काम नहीं चलेगा, हमें पहल करनी होगी, परिवर्तन की जिम्मेदारी लेनी होगी और खुश रहना होगा तभी ऑफिस में उत्साह की भावना आएगी।
एक दिवसीय कार्यशाला में तपसदास मोहापात्रा ने कहा कि सुखी और खुश रहने वाला मन काम की क्षमता को बढ़ाता है। कुछ लोग काम पर सिर्फ अपना हार्डवेयर रूपी शरीर लेकर पहुंचते हैं पर अपना सॉफ्टवेयर रुपी मन घर पर ही छोड़ आते हैं। इसके पीछे खाली उनके कौशल में कमी ही कारण नहीं है जबकि उनके मन में उत्साह की कमी भी इसका बड़ा कारण है।
उन्होंने बताया की कभी-कभी नियमित नौकरी और अन्य मुद्दों से हमारी ऊर्जा इतनी नष्ट हो जाती है कि हम जीवन के प्रति उत्साह खो देते हैं। जब यह कुछ समय के लिए दोहराया जाता है तो यह हमारी आदत का हिस्सा बन जाता है और खराब रवैये, प्रदर्शन और तनावपूर्ण रिश्तों के रूप में प्रकट होने लगता है। इस वर्कशॉप में राज्य भर से आए करीब 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।