अवैध बूचड़खानों पर देशभर में राजनीति गर्माई हुई है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के अवैध बूचड़खानों पर की गई कार्रवाई के बाद अब राजस्थान में भी इसी प्रकार की कार्रवाई की मांग उठने लगी है। राजस्थान विधानसभा में भी अवैध बूचड़खानों को बंद करने की मांग गूंज रही है। संबंधित विधायकों का कहना है कि प्रदेश में 90 प्रतिशत बूचड़खाने अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
प्रदेश सरकार पर अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। निगम के महापौर अशोक लाहोटी के अनुसार 1 अप्रेल को जयपुर नगर निगम अवैध बूचड़खानों पर कार्यवाही शुरू करेगा।लेकिन प्रदेशभर में इनके खिलाफ कार्यवाही कब शुरू होगी, इस बारे में अभी सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है। निगम की कार्यवाही में बूचड़खानों, मीट व्यवसायियों और मीट परोसने वाले होटल्स के पंजीकरण जांचे जाएंगे।
यही नहीं अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई की मांग के चलते जयपुर शहर के बड़ी चौपड़ स्थित एक मंदिर में धर्म संसद का बुधवार को आयोजन होना है। जानकारी के अनुसार इसमें बड़ी संख्या में हिन्दु संत एकत्रित होंगे। वहीं दूसरी ओर से अवैध बूचड़खानों पर कार्यवाही के लिए जयपुर नगर निगम भी तैयारी कर रहा है।
निगम के आंकड़ों के अनुसार अकले जयपुर शहर में ही करीब 700 से अधिक अवैध बूचड़खाने है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि जयपुर में करीब 1700 बूचड़खाने है, लेकिन इनमें से लाइसेंस करीब 1004 के पास ही है। जानकारी के अनुसार शहर में अवैध बूचड़खाने पुराने शहर में सबसे अधिक है।
इधर, विधानसभा में राजपा विधायक किरोड़ीलाल मीणा, सत्तापक्ष के विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने सदन में यह मामला उठाया और उनकी इस मांग को अन्य विधायकों का भी समर्थन मिलने लगा है।