जिस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, उस वीभत्स मामले के तार राजस्थान से भी जुड़े हैं। दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप केस में दो दोषी करौली जिले के निवासी थे, जिससे राजस्थान का भी नाम खराब हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए चारों दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। 16 दिसंबर 2012 को हुई घटना में राजस्थानी मूल के दो जने भी शामिल थे। मुख्य आरोपी रामसिंह और मुकेश मूलत: राजस्थान के करौली जिले के कल्ला ढह निवासी हैं। घटना के समय रामसिंह की उम्र 34 साल और उसके भाई मुकेश की उम्र 26 साल के आस पास थी। वे दिल्ली की रविदास कॉलोनी में रह रहे थे। रामसिंह बस ड्राइवर का काम करता था और मुकेश खलासी का। दोनों भाई अपनी कॉलोनी में अपनी बुरी आदतों की वजह से कुख्यात थे।
दोनों भाई शराब पीकर हंगामा करने में शामिल रहा करते थे। बताया जाता है कि कमाई के लिए दिल्ली आने से पहले करौली में ही लोकल स्कूल से शुरुआती शिक्षा ली और दिल्ली आ गए। माता पिता के साथ राजधानी में आए तो सही, लेकिन किस्मत बुरी रही।
माता पिता दोबारा अपने गांव लौट गए। उसके बाद इन पर किसी तरह का कोई डर नहीं रहा। तीन बच्चों का पिता राम सिंह की पत्नी की मौत कैंसर से हो गई। उसके बाद तो उसने बहुत ज्यादा शराब पीना शुरू कर दिया। वे अपने पड़ोसियों के बीच में शराब, अपराध, मारपीट जैसी बातों के लिए जाने जाने लगे।
जानकारी के मुताबिक रामसिंह और मुकेश दोनों ने पीड़िता और उसके दोस्त के साथ रोड से मारपीट की थी। अपराध के बाद जब सभी वहां से फरार हो गए। पुलिस ने अगले ही दिन सबसे पहले रामसिंह पकड़ा और आरके पुरम से बस को धर लिया।
ड्राइवर राम सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उसकी निशानदेही पर उसके भाई मुकेश, एक जिम इंस्ट्रक्टर विनय गुप्ता और फल बेचने वाले पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्म-हत्या कर ली। हालांकि रामसिंह की मौत के बाद उसके परिवार वालों व वकील ने कहा कि जेल में उसकी हत्या की गई है।