जीएसटी के कारण महंगाई का कद बढ़ गया और रावण का कद छोटा हो गया है। रावण के पुतलों के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि इस बार रावण के पुतले बनाने के आॅर्डर इतने नहीं मिले जितने कि कारीगर आशा कर रहे थे।
जीएसटी ने रावण बनाने के काम आने वाली सामग्री को महंगा कर दिया है। इसके चलते रावण के पुतलों की लागत बढ़ गई और उनकी कीमत में इजाफा हो गया। ऐसे हालात में महंगे दामों के चलते खरीददार भी रावण के पुतलों से दूरी ही बनाए हुए हैं। कारीगरों का कहना है कि परंपरागत रूप से केवल जहां मेला लगता है वहीं रावण के पुतले बनाने का आॅर्डर मिला है। फतेहपुर सीकरी से आए कारीगर बताते हैं कि रावण बनाने के लिए काम में आने वाली चीजों पर जीएसटी लगने से बाजार में बांस, कागज, तार सहित अन्य चीजें महंगी हो गई है। ऐसे में बिक्री तो कम ही है, साथ ही बचत भी ना के बराबर है। महंगे दामों के चलते शहरभर से मिलने वाले आर्डर भी नहीं मिले हैं।
उधर, कोटा में प्रसिद्ध दशहरा मेले की तैयारियां यहां जोरों पर हैं। इस साल भी यहां 72 फीट का रावण और 40-40 फीट के कुंभकरण व मेघनाद के पुतले बनाए गए हैं। जबकि पिछले साल मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलें 45-45 फुट के थे। इन्हें यहां मेला प्रांगण में क्रेनों के जरिये खड़ा करने का काम किया जा रहा है।