जोधपुर कोर्ट ने एक महिला पुलिस अधिकारी को उसकी छोटी सोच के कारण फटकार लगाई है। महिला अफसर ने एक सुसाइड केस की जांच रिपोर्ट में बड़ी ही अजीबो गरीब टिप्पणी की थी। मामला 2016 के अक्टूबर माह का है जब एक महिला द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में केस की जांच कर रही महिला पुलिस अधिकारी पूजा यादव ने अपनी रिपोर्ट में लिखा 'यदि कोई शादीशुदा महिला किसी पराए मर्द से बातचीत करती है तो इसका मतलब यह है कि वो अपने पति से खुश नहीं है '।
इस आत्महत्या मामले में मृतका ने सुसाइड नोट में अपने पति और ससुराल पक्ष के लोगों पर उत्पीड़ित करने का आरोप लगाया था। जांच अधिकारी पूजा यादव ने यह कहते हुए कि 'मृतका के पति और उसके ससुराल वालों को उसका किसी गैर मर्द से बात करना पसंद नहीं था और उन्हें ये जानने के पूरा हक है कि वो किस से क्या और क्यों बात करती है' उनके उपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें छोड़ दिया। पुलिस अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा कि महिला ने आत्महत्या मानसिकता खो जाने के कारण की है।
मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी अपनी टिप्पणी की और कहा कि जांच अधिकारी खुद महिला होते हुए दूसरी महिलाओं के प्रति ऐसी सोच रखती है। कोर्ट ने मामले की फिर से जांच करने के आदेश देते हुए कहा कि पुलिस ने मृतका द्वारा लिखे सुसाइड नोट को नजरअंदाज किया गया वहीं फॉरेन्सिक जांच रिपोर्ट आने का भी इंतजार नहीं किया गया। कोर्ट ने जोधपुर पुलिस कमिश्नर को इस मामले की जांच करने के लिए किसी अन्य पुलिस अधिकारी को शामिल किए जाने का भी फरमान सुनाया है।