जयपुर-जोधपुर सहित प्रदेश के छह प्रमुख शहरों में मास्टर प्लान की दुर्दशा को लेकर दायर जनहित याचिका पर कोर्ट ने शुक्रवार को फिर सुनवाई की। सरकार की ओर से पेश की गई पालना रिपोर्ट पर असंतोष जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट मे केवल औपचारिकता दिख रही है। छोटे-मोटे अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट पेश कर दी गई है जबकि यह तो नगर निगम की रोज की कार्रवाई है।
न्यायाधीश संगीत लोढा व जस्टिस अरुण भंसाली की विशेष खंडपीठ में शुक्रवार को करीब तीन घंटे तक सुनवाई चली। हाईकोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद पालना रिपोर्ट पर आदेश सुरक्षित रखा है। हाईकोर्ट के आदेश की पालना नही होने पर अवमानना याचिका पेश की गई लेकिन उस पर सुनवाई नही हुई। शुक्रवार को अंतिम कार्य दिवस होने की वजह से अधिवक्ताओं द्वारा न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया गया था, लेकिन जनहित का मुद्दा होने से अधिवक्ताओं ने इस मामले में पैरवी की।
सरकार की ओर से महाधिवक्ता एनएम लोढा, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार और जेडीए व निगम के अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी व पूनम चंद भंडारी ने पैरवी की।
हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष को सुनने के बाद नाराजगी जाहिर करते हुए कहा एक व्यक्ति के हित का आदेश नही है हमारा दर्द इतना है कि आप आमजन के हितो को देखें। हाईकोर्ट ने 12 जनवरी को जो आदेश दिया था उसमें फुटपाथ, हाईवे के दोनों ओर अतिक्रमण, ग्रीन बैल्ट व गोचर भूमि को लेकर पालना रिपोर्ट पेश करो।
कोर्ट ने कहा कि यह इधर—उधर की बात मत करो, आप तो यह बताओ की क्या एक्शन प्लान बनाया और क्या पालना कि गई है? कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आपसे सभी को उम्मीद है लेकिन लगता है आप अधिकारियों की रिपोर्ट से ही इतिश्री कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने पालना रिपोर्ट पर आदेश को सुरक्षित रखा है।