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करवा चौथ पर तिरंगे में लिपटे पहुंचा वीरांगना का सुहाग, हो गई आंखें नम

Sun, 08 Oct 2017 06:09 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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पत्नी और बच्चे के साथ सतीश(गोले में)
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जब तिरंगे में लिपटा शहीद का शव गांव में पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गई। सैनिक सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार हुआ।    
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अरुणाचल में बीते शुक्रवार सुबह छह बजे एयरफोर्स का एमआई-17वी5 हेलिकॉप्टर पटोगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना में सात जवान शहीद हो गए। इन शहीदों में राजस्थान के झुंझनूं जिले के कासनी गांव का रहने वाला सतीश भी शामिल था। सतीश का शव आज पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाया गया।  करवा चौथ के दिन अपने पति को तिंरगे में लिपटे शहीद की पत्नी पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वर्ष 2013 में शहीद सतीश की शादी जयपुर के सांगानेर इलाके में रहने वाली किरण के साथ हुई थी।

ग्रामीण भी अपने लाल की बहादुरी को सलाम कर रहे थे। अंतिम संस्कार में आज यहां पूरा गांव उमड़ पड़ा। पूरे सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार हुआ।  ढाई साल के बेटे हर्ष ने पिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर जिले के कलक्टर सहित एयरफोर्स के अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी अपनी शोक संवेदनाएं जताई हैं।
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पांच बहनों का था इकलौता भाई

सतीश
सतीश की तीन बहनों निर्मला, सुनिता और बनिता की शादी हो गई है। दो बहनें नीतू और दर्शना अभी एमए और नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं। सतीश जून में गांव आया था और छुट्टियां बिता कर 10 जुलाई को वापस ड्यूटी पर लौटा था।

सतीश का सपना था कि गांव के युवा सेना में जाकर देश की रक्षा करे। इसके लिए वह युवाओं को ट्रेनिंग देना चाहता था। उसके दोस्त ने बताया कि सतीश की इच्छा थी कि वह गांव में युवाओं के लिए कोचिंग खोले और सेना में जाने के लिए उन्हें प्रेरित करें। किसान परिवार के सतीश का बचपन काफी मुश्किलो में गुजरा है। पिता ताराचंद की मौत के बाद मां अंगूरी देवी ने ही मेहनत मजदूरी करके उसे पढ़ाया-लिखाया।
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