कोटा में आयोजित ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) कोटा निवेशकों को कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए एक उपयुक्त मंच उपलब्ध कराएगा। ग्राम का आयोजन 24 से 26 मई तक कोटा में होगा।
कृषि आयुक्त विकास सीतारामजी भाले ने बताया कि वर्तमान में कोटा सम्भाग में अच्छी गुणवत्ता एवं उच्च उपज वाली फसलों की खेती की जा रही है, लेकिन प्रोसेसिंग इंडस्ट्री काफी कम है। ऐसे में यहां इसके लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2015-16 में राज्य के कुल गेहूं के उत्पादन में अकेले कोटा सम्भाग का 17 प्रतिशत का योगदान था, जिससे गेहूं इस सम्भाग व राजस्थान की महत्वपूर्ण फसल बनी हुई है। हालांकि, सम्भाग के सभी चार जिलों कोटा, झालावाड़, बूंदी एवं बारां में गेहूं की प्रोसेसिंग सीमित स्तर पर है। स्थानीय खपत के साथ-साथ बढ़ती आबादी के लिए भी गेहूं की पिसाई की इकाइयों की स्थापना के लिए बहुत अधिक अवसर मौजूद हैं।
कोटा में राज्य के कुल सोयाबीन उत्पादन का लगभग दो तिहाई उत्पादन होता है। यहां सोया बेस्ड फूड, सोया पेस्ट एवं सॉस जैसे कई वैल्यू एडेड उत्पादों के उत्पादन में निवेश के अवसर मौजूद हैं। सोयामील प्रोसेसिंग फैसेलिटीज में निवेश किया जाना इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कोटा सम्भाग में सरसों की भी मजबूत स्थिति है। देश में सरसों का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद सम्भाग में सरसों की प्रोसेसिंग काफी सीमित स्तर पर है। ऎसे में सरसों की प्रोसेसिंग में अवसर काफी मौजूद हैं। इसमें दवा उद्योग में सरसों का उपयोग, राजस्थानी मसाले के रूप में सरसों की मार्केटिंग, खाद्य तेल बनाने के लिए कच्चे तेल को शुद्ध किया जाना एवं अन्य शामिल है।
कोटा के कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किए गए प्रयोगों से ज्ञात हुआ है कि इस क्षेत्र की मिट्टी एवं जलवायु किनोआ की पैदावार में सहयोगी है। अपने अनेक स्वास्थ्य लाभों के कारण किनोआ ने विश्व स्तर पर लोकप्रियता हासिल की है। इस प्रकार यहां किनोआ की खेती करने में अपार अवसर उपलब्ध हैं।