राजस्थान को विशेष मदद का मामला एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार के सामने उठाया गया है। यहां कि विपरीत परिस्थितियों के मद्देनजर राज्य सरकार ने केंद्रीय सहायता राशि को बढ़ाने समेत कई मांग की।
यह मांग राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण (एनपीडीआरआर) की बैठक में रखी। कटारिया ने कहा कि राजस्थान ने पिछले 67 सालों में से 60 साल सूखा झेला है। इसके साथ ही बाढ़, आग और भूकम्प जैसी आपदाओं का भी सामना किया। राजस्थान रेगिस्तानी प्रदेश है और यहां संसाधनों की भारी कमी है। ऐसे में अधिक से अधिक केन्द्रीय मदद राजस्थान को मिलनी चाहिए।
कटारिया ने यहां पैदा होने वाली सभी फसलों और प्राकृतिक आपदाओं को आपदा राहत मापदंडों में शामिल करने और सहायता जारी करने का ऐसा मैकेनिज्म लागू करने का सुझाव दिया जिससे प्रभावित को तत्काल मदद मिल सके। उन्होंने सूखाग्रसित क्षेत्राें के लोगों और पशुधन को बचाने के लिए भी केंद्रीय सहायता राशि बढ़ाने का आग्रह किया।
इस दौरान कटारिया ने राजस्थान में चल रहे जल स्वावलंबन अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान में 6 लाख जल ढांचे बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले वर्ष में राज्य की सभी 295 पंचायत समितियों के 3529 गांवों में करीब 95 हजार जल संरक्षण के कार्य किए गए। जिसका परिणाम ये रहा कि ये सभी जल ढांचे पहली बारिश में ही लबालब हो गए। साथ ही, डार्क जोन में भी जलस्तर बढ़ने लगा है।
कटारिया ने बताया कि पिछले साल भारी बारिश के कारण राज्य के विभिन्न जिलों में फंसे हुए 1598 लोगों को रेस्क्यू ऑपरेशन द्वारा बचाया गया। उन्होंने उदयपुर, सिरोही और कोटा के जंगलों में लगी भीषण आग का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने पहली बार सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से उस पर काबू पाया।
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजूजू सहित अन्य प्रदेशों के आपदा राहत मंत्री एवं अधिकारी मौजूद रहे।