इस स्वाधीनता सेनानी का मानना है कि मंदिर बचेंगे तो संस्कार व नैतिकता बचेगी, देश भी खुद-ब-खुद सुधर जाएगा। इन्होंने मंदिर के लिए अपनी पूरी पेंशन दे दी है।
राजस्थान के उदयपुर के स्वाधीनता सेनानी सुजानमल जैन ने रेलवे से 1982 में अपनी सेवानिवृत्ति के बाद जितना बचाया उसे स्वयं की 4600 वर्ग फीट जमीन पर मंदिर बनाकर समाज को समर्पित कर दिया। जब उनसे यह प्रश्न पूछा गया कि आजकल मंदिर के बजाय अनाथ बच्चों और गरीबों को दान देने की बात की जा रही है, तब उन्होंने कहा कि देखिये, धर्म बचेगा तो समाज में संस्कार और नैतिकता भी बचेगी।
स्वाधीनता आंदोलन पर विशेष बातचीत में वयोवृद्ध स्वाधीनता सेनानी ने अपनी बात को गहराई से समझाया। उन्होंने कहा कि आज देश इसी समस्या से जूझ रहा है कि चाहे बेरोजगार हो, आईएएस अफसर हो या राजनेता-मंत्री, सभी ने अपने नैतिक मूल्य खो दिए हैं। नैतिक मूल्यों को व्यक्ति के आचरण का हिस्सा स्कूलों में घुट्टी घोलकर नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए उसे अपने धर्म को समझना होगा।