राजस्थान में डॉक्टरों की हठधर्मिता एकबार फिर से मरीजों पर भारी पड़ी और लगातार चौथे दिन भी सरकार और डॉक्टरों के बीच वार्ता विफल रही। देर रात तक डॉक्टरों और सरकार के बीच चली वार्ता के बीच कुछ बिंदुओे पर सरकार को झुकना भी पड़ा फिर भी ये वार्ता विफल रही।
गुरूवार को डॉक्टरों की हड़ताल के चौथे दिन भी सरकार और डॉक्टरों के बीच पहले तो शाम को वार्ता विफल हो गई मगर देर रात करीब 12 बजे तक चली वार्ता में सरकार की तरफ से की गई पहल के बाद ही कुछ राहत की सांसे मिलती दिखाई दी लेकिन डॉक्टरों की हठधर्मिता के आगे सरकार भी कुछ नहीं कर पाई।
चिकित्सा संघ प्रतिनिधियों और सरकार के बीच हड़ताल के चौथे दिन चली वार्ता के दौरान देर रात सरकार ने सेवारत चिकित्साकर्मियों की वित्त मांगों के 6 में से 5 बिंदुओ पर हामी भर दी। हालांकि इसके बाद भी अन्य बिंदुओ वार्ता का दौर जारी रहा मगर डॉक्टर अंत में बातचीत छोड़कर चले गए।
इससे पहले गुरूवार शाम 4 बजे चिकित्सक संघ के पदाधिकारीयों से चिकित्सा मंत्री की वार्ता तय थी, मगर बैठक में पदाधिकारियों के लेट पहुंचने और चिकित्सक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी के बैठक में नहीं पहुंचने के चलते वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई थी बाद में डॉ. अजय चौधरी देर शाम वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार हुए।
मंत्रीजी ने बहुत देर किया इंतजार
एक अस्पताल में खाली पड़ी कुर्सियां
- फोटो : Amar Ujala
बताया गया है कि आज वार्ता शुरू होने से पहले सरकार और चिकित्सक प्रतिनिधीमंडल के बीच गतिरोध शुरू हो गया जिससे ये साफ ही हो चुका था कि आज भी वार्ता बेनतीजा ही रहने वाली है मगर चिकित्सा विभाग के प्रयासों से आखिरकार सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी सचिवालय पहुंचे और वार्ता का दौर शुरू हुआ। चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने काफी देर तक चिकित्सा भवन में चिकित्सा संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चौधरी का इंतजार किया।
अफसरों ने कहा 'चौधरी के आने पर ही होगी वार्ता'
हड़ताल समाप्त होने की उम्मीद में डॉक्टर के रूम के बाहर बैठे मरीज और उनके परिजन
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पहले तो राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी वार्ता में शामिल होने नहीं पहुंचे और अपने प्रतिनिधीमंडल को भेज दिया वहीं चिकित्सा विभाग के अफसर भी इस बात पर अड़ गए कि अजय चौधरी के ही आने पर सरकार अपनी वार्ता शुरू करेगी। इतना सुनते ही चिकित्सक संघ के पदाधिकारी बैठक छोड़कर रवाना हो गए।