भारतीय सेना 30 वर्ष से नई तोप अपने बेड़े में सम्मलित होने का इंतजार कर रहीं है। अमेरिकन तोप हॉवित्जर को सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद इस तोप को अंतिम परीक्षण के लिए जैसलमेर के पोकरण लाया गया हैं। लेकिन जिस जमीन पर परीक्षण होना है उस पर विवाद हो गया है। इसलिए हॉवित्जर का परीक्षण अभी तक प्रारंभ नहीं हो सका है। जानकारी के अनुसार विवाद भारतीय सेना और भदरिया मंदिर सेवा समिति के 1.10 लाख बीघा को लेकर है।
इस जमीन पर हॉवित्जर के परीक्षण की बात सामने आई तो समिति ने इस पर विरोध दर्ज कराते हुए जिला कलेक्टर से दखल की मांग की है। वहीं दूसरी ओर सेना ने इस विवादित जमीन के मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गई है। गौरतलब है कि इससे पूर्व जमीन को लेकर फैसला मंदिर समिति के हक में आ चुका है। मंदिर समिति के अनुसार यह चारागाह भूमि है और सेना यहां परीक्षण करना चाहती है। विवाद के चलते एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों का परीक्षण टल गया है।
उम्मीद की जा रही है कि अब परीक्षण जून के दूसरे सप्ताह से ही प्रारंभ होंगे। जानकारी के अनुसार सेना करीब डेढ माह तक इन तोपों का परीक्षण भारत में तैयार गोलों से करेगी। फिलहाल अमेरिका की बीएई कंपनी से दो तोपें भारत लायी गई। अगले वर्ष नवंबर तक तीन और तोपें भारत आने की उम्मीद है। भारत कुल 145 हॉवित्जर तोपें खरीद रहा है। जिसमें 25 तोपें अमेरिका से लायी जाएंगी। जबकि 120 तोपें बीएई भारत में ही महिंद्रा कंपनी के साथ मिलकर तैयार करेगी।