फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब लाठी-डंडों से नहीं, बंदूकों से सुरक्षा करेंगे सरिस्का में तैनात गार्ड

Thu, 26 Oct 2017 05:30 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
विज्ञापन
हथियारों के साथ तैनात गार्ड्स - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सरिस्का अभयारण्य में तैनात फोरेस्ट गार्ड अब लाठी-डंडों से नहीं बल्कि बंदूकों से लैस कर दिए गए हैं। हथियार मिलने के बाद इन गार्ड्स में खुशी की लहर है।
विज्ञापन


दरअसल, राजस्थान के अलवर में स्थित सरिस्का अभयारण्य में शिकारियों की बढ़ती घुसपैठ के चलते वन्यजीव और जंगल की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में यहां लाठी-डंडे लेकर तैनात वनकर्मी हथियारों से लैस शिकारियों का मुकाबला करने में असमर्थ थे। जंगल की सुरक्षा में तैनात ये वनकर्मी कई बार अपनी ये पीड़ा उच्च स्तर पर अवगत भी करा चुके थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अभी कुछ दिन पहले ही अमर उजाला डिजिटल टीम ने यहां हुए सांभर के शिकार की घटना को प्रमुखता से उजागर किया।

'शिकारियों के निशाने पर सरिस्का, अब हुआ सांभर का शिकार' शीर्षक से प्रसारित खबर में इन वनकर्मियों को पीड़ा को भी उजागर किया। जिसके बाद सरिस्का प्रशासन ने जंगल में तैनात गार्ड्स को हथियार देकर रात्रि गश्त के लिए टीम भी बनाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अभी यहां हुआ था शिकार

हथियारों के साथ वनकर्मी - फोटो : amar ujala
गौरतलब है कि सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में स्थित बाघ परियोजना में बीते शनिवार की देर रात बालेटा नाका में रोट कला चौकी के समीप शिकारियों ने घुसपैठ कर सांभर का शिकार किया। पांच से सात शिकारी हथियारों से लैस होकर यहां प्रवेश कर गए। जबकि चौकी पर तैनात वनकर्मी डंडे के भरोसे ​यहां ड्यूटी दे रहे थे। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि वे बंदूकों से लैस शिकारियों का कैसे मुकाबला करें।

वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामवीर गुर्जर ने बताया कि जंगल में ड्यूटी के दौरान हथियार मुहैया कराने की मांग करते आ रहे थे। अब सरिस्का प्रशासन के नए आदेश से वनकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध हो सकेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें