राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जल संरक्षण का मुद्दा प्रदेश के लिए अहम है। ऐसे में सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि प्रकरण को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दायर हो गई हैं। इसलिए सभी याचिकाओं को निस्तारित करते हुए केवल इस संबंध में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान याचिका पर सुनवाई की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्राजोग और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश महेश पारीक व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने याचिका पर सुनवाई 18 सितंबर को तय करते हुए कहा है कि निस्तारित की गई याचिकाकर्ता चाहे तो स्वप्रेरित प्रसंज्ञान में अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके अलवा यदि वे कोई दस्तावेज भी पेश करना चाहे तो उन्हें इसकी स्वतंत्रता है।