यदि घर—घर से कचरा उठाने के लिए कर्मचारियों को पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता हो तो कानून व्यवस्था के हालात क्या होंगे, अंदाजा लगाया जा सकता है। कचरा उठाने वाली गाड़र के साथ 10—15 की संख्या में चलते पुलिसवाले यह नजारा राजधानी जयपुर का है।
यहां सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते नगर निगम ने कचरा कलेक्शन का ठेका एक निजी कंपनी को दिया है। लेकिन हड़ताली कर्मचारियों के डर से कचरा कलेक्शन को पुलिस प्रोटेक्शन दिया जा रहा है। डर इतना कि शहर के वीवीआईपी क्षेत्रों में पुलिस की सुरक्षा में ही कचरा एकत्रित किया जा रहा है। ऐसा नजारा केवल एक वार्ड में नहीं था अपितु शहर आठ वार्डों में इस तरह का मंजर देखा गया। पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रारंभ की गई इस सेवा के पहले दिन हालांकि खानापूर्ति ही रही। लेकिन कचरे के लिए पुलिस की सुरक्षा शहर में चर्चा का विषय रही।
वहीं निगम के मेयर व अन्य अधिकारियों का कहना है कि डोर टू डोर कचरा उठाने की व्यवस्था प्रारंभ हो गई है। कुछ परेशानियां हैं, इसलिए पुलिस की सुरक्षा में कचरा उठाया जा रहा है। शहरवासियों की इन परेशानियों को जल्द से जल्द दूर कर दिया जाएगा।