बच्चों की तस्करी करने के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बेखौफ लोग थोड़े से पैसे का लालच लेकर इन बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जा रहे हैं।
ताजा मामला उदयपुर से जुड़ा है जहां की कोटड़ा थाना पुलिस ने शनिवार देर रात उदयपुर से अम्बाजी (गुजरात) जा रही राजस्थान रोडवेज की बस से सात बाल श्रमिकों को मुक्त करवाया है। इन बच्चों की उम्र दस से चौदह वर्ष है। सभी बाल श्रमिक आदिवासी बहुल उपखण्ड कोटड़ा और झाड़ोल के अलग-अलग गांवों से हैं। इन्हें दो ठेकेदार परिजनों की अनुमति के बिना गुजरात मजदूरी के लिए ले जा रहे थे। गनीमत रही कि रास्ते में ही पुलिस ने इन्हें मुक्त करवा लिया। हालांकि, दोनों ठेकेदार पुलिस कार्रवाई से पहले ही सूचना मिलने पर फरार हो गए।
उधर, जेजे एक्ट के तहत बच्चों को बाल कल्याण समिति के पास भेजना होता है, लेकिन जब पुलिस ने इन बच्चों को कोटड़ा के कार्यवाहक तहसीलदार के समक्ष पेश किया तो उन्होंने इन्हें बाल सुधार गृह भेजने के आदेश दे दिए। हालांकि, बाद में बाल सुधार गृह पहुंचने पर वहां के अधीक्षक ने नियमानुसार उन्हें बाल कल्याण समिति के पास भिजवाया। समिति सदस्य बी.के. गुप्ता ने सभी बच्चों को तीतरड़ी स्थित आसरा ओपन शेल्टर भेजा और उनके स्वास्थ्य परीक्षण के आदेश दिए।
गुप्ता ने बताया कि चार बच्चे कोटड़ा, दो फलासिया व एक झाड़ोल का रहने है। ठेकेदार सभी बच्चों को 130 रुपए प्रतिदिन मजदूरी की कहकर गुजरात ले जा रहा था। एक ठेकेदार बच्चों के साथ बस में साथ था, जबकि उसका सहयोगी मोटरसाइकिल पर बस के पीछे आ रहा था। पुलिस कार्रवाई की सूचना मिलने पर दोनों बीच रास्ते में ही भाग निकले।