राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद भी चिकित्सा विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी को छठे वेतन आयोग के तहत लाभ नहीं देने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा है कि 12 दिसंबर तक आदेश की पालना की जाए।
ऐसा नहीं करने पर तत्कालीन मुख्य सचिव ओपी मीणा, प्रमुख वित्त सचिव पीएस मेहरा, प्रमुख स्वास्थ्य सचिव वीनू गुप्ता, उप सचिव मुकुंद शर्मा और स्वास्थ्य निदेशक बीआर मीणा सहित अन्य संबंधित अधिकारी पेश होकर अपना स्पष्टीकरण पेश करें। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए स्वास्थ्य निदेशक वीके माथुर को भी पक्षकार बनाया है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश डॉ. किशनसिंह राठौड की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता वाईसी शर्मा ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने गत वर्ष 11 जनवरी को आदेश जारी कर दिसंबर 2006 में सेवानिवृत्त हुए याचिकाकर्ता को छठे वेतन आयोग के तहत पारिणामिक लाभ देते हुए पेंशन-परिलाभ देने को कहा था। वहीं हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी गत 17 फरवरी को एकलपीठ का आदेश बहाल रखा था।
इसके बावजूद भी अब तक आदेश की पालना नहीं की गई। वहीं राज्य सरकार की ओर से आदेश की पालना के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने 12 दिसंबर तक आदेश की पालना नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों को पेश होने के आदेश दिए हैं।