बस स्टैंड में बहता राजसमंद झील का पानी
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करीब आधी शताब्दी से खाली पड़ी राजसमंद झील के भरने के साथ ही उसके पेटे और अपवाह क्षेत्र में किए गए अतिक्रमणों की पोल खुल कर सामने आ गई है। वहीं झील की पेटा काश्त जमीन पर खेती करने वाले किसानों के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वांसोल में झील पर चादर चलती देखने के लिए रोज लोगों का हुजूम उमड़ रहा है।
इधर मोही गांव के चैक में पानी भरने से ग्रामीण परेशान है। मोही के बीच से राजसमंद का पानी निकल रहा है। यूं कहे कि वर्तमान में मोही राजसमंद से निकलने वाली नदी के पेटे में बस गया है। इसका बस स्टैंड पूरी तरह से नदी में तब्दील हो गया है।
झील को छलकता देखने के लिए राजनगर-कांकरोली के निकट के सभी क्षेत्रों यहां तक की उदयपुर से भी लोग पहुंच रहे हैं। वहीं नौचैकी की छतरियों में पानी आने के बाद राजसमंद किसी समुद्र से कम नजर नहीं आ रहा है। द्वारिकाधीश मंदिर परिसर में बने घाट की छटा भी बदल गई है। वहां पर सीढ़ियों पर पानी छू गया है। इससे कांकरोली शहर के लोग अब वहां तैराकी करने और नहाने के लिए पहुंचने लगे हैं।