राजस्थान हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस बढ़ोतरी के मामले में महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज की ओर से उच्चतम न्यायालय में लंबित एसएलपी पर आने वाले आदेश को इन पर लागू करने कहा है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीतसिंह की खंडपीठ ने यह आदेश डॉ. श्रवण राम की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता राजेन्द्र सोनी ने अदालत को बताया कि उच्चतम न्यायालय ने मेडिकल कॉलेज में फीस तय करने के लिए पूर्व न्यायाधीश एसएन भार्गव की अध्यक्षता में फीस कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। इस कमेटी को सभी निजी मेडीकल कॉलेजों के लिए फीस तय करनी थी।
इसके बावजूद भी निजी कॉलेज अपने स्तर पर ही मनमाने रूप से फीस तय कर रहे हैं। याचिका में कहा गया कि सत्र 2014-15 में निम्स की फीस 36 लाख रुपए थी। जिसे सत्र 2016-17 में बढ़ाकर 90 लाख रुपए कर दिया। इसी तरह फीस कमेटी ने उदयपुर के पेसेफिक कॉलेज के लिए साढे सात लाख रुपए फीस तय की थी, लेकिन कॉलेज तय फीस से कई गुणा फीस ले रहा है। याचिका में गुहार की गई है कि विद्यार्थियों से ली गई अधिक फीस लौटाई जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने एसएलपी पर आने वाले निर्णय को प्रकरण में लागू करने को कहा है।