राजस्थान में चल रहे किसान आंदोलन और तनाव के बीच सरकार ने अन्नदाताओं की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया है। राजस्थान विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने सदन में घोषणा की है कि सरकार जेलों में बंद किसान नेताओं को रिहा कर देगी।
किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने करीब तीन दिन पहले से किसान नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू कर दी थीं। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा और सरकार पर तानाशाही चलाने का आरोप भी जड़ा। इससे सत्ता पक्ष के सदस्यों और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ। शून्यकाल शुरू होते ही विपक्ष के कई सदस्य किसान नेताओं की रिहाई और उनकी मांगें पूरी करने के लिए वेल में आ गए।
सभी ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान जमकर नौंक-झौंक हुई। हंगामे को देख सदन को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तब गुलाब चंद कटारिया ने गिरफ्तार किसान नेताओं के रिहा करने की घोषणा की।
किसानों का महापड़ाव और रास्ते जाम
किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
शुन्यकाल के दौरान कांग्रेस के गोविन्द डोटासरा, श्रवण कुमार और बसपा विधायक मनोज न्यांगली व निर्दलीय विधायक नंदकिशोर मेहरिया, राजकुमार शर्मा, नंदकिशोर मेघवाल सहित सभी विपक्ष के सदस्य वेल में आ गए। उन्होंने कहा कि किसान सड़कों पर हैं और जयपुर-सीकर के बीच के रास्ते जाम हैं।
गौरतलब है कि किसानों ने विधानसभा घेराव की घोषणा के बाद सीकर से जयपुर की ओर मार्च किया। सरकार ने जयपुर के नजदीक चौमूं टोल प्लाजा पर किसानों को रोक दिया। किसान यहीं हाईवे पर बैठ गए, जिससे बृहस्पतिवार को जयपुर-सीकर हाईवे जाम रहा। इधर, किसानों ने सीकर के रामू का बास में महापड़ाव की घोषणा कर दी।
ये हैं मांगें और इतने किसान नेता हैं अंदर
किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
एक दिन पूर्व उग्र आंदोलन के अंदेशे को भांपते हुए राजस्थान सरकार ने दो दिन पूर्व ही किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमराराम, पेमाराम सहित 80 से ज्यादा किसान नेताओं को जेल में डाल दिया है।
गौरतलब है कि किसान पूर्ण कर्ज माफी और राजस्थान सरकार के साथ पूर्व में हुए लिखित समझौते की मांग को पूर्ण करने पर अड़े हुए हैं। इधर, अखिल भारतीय किसान सभा की राज्य कमेटी ने किसानों से आह्वान किया है कि वे सभी जगह-जगह धरना देने के बजाय रामू का बास पहुंच जाएं।