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एमपी से सटे हाड़ौती में किसानों ने जलाया लहसुन, मंदसौर जैसे आंदोलन की चेतावनी

Wed, 07 Jun 2017 04:30 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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कोटा की किसान मंडी में कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का पोस्टर जलाते किसान और सड़कों पर फैला लहसुन - फोटो : amar ujala
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मध्यप्रदेश से लगते राजस्थान में हाड़ौती क्षेत्र में किसान लहसुन की बम्पर फसल से परेशान हैं। लहसुन के समर्थन मूल्य की मांग को लेकर किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ बुधवार को कोटा में लहसुन जलाकर प्रदर्शन किया।
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किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। कोटा में इस बार लहसुन की बंपर पैदावार हुई है जिसके चलते किसानों को उनकी इस उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसान सरकार से लहसुन का समर्थन मूल्य घोषित कर उस पर सरकारी खरीद की मांग कर रहे है। प्रदर्शनकारी कोटा में पिछले दिनों लहसुन का भाव कम होने से सदमे में हुई किसान सत्यनारयाण मीणा की कथित मौत की जांच और और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की।

हाड़ौती की किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों को राहत नहीं दी गई तो राजस्थान में भी एमपी की तरह बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस मांग को लेकर किसानों ने पुरानी धान मंडी में प्रतीकात्मक तौर पर लहसुन जला कर सरकारी नीतियों को विरोध किया। 
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यूथ कांग्रेस ने भी किसानों की समर्थन में एरोड्रम से लेकर कृषि उपजमंडी धानमंडी तक रैली निकाली गई। पीसीसी महासचिव पंकज मेहता, कांग्रेस नेता नईमुद्दीन गुड्डू, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष भानु प्रताप के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पीएम नरेन्द्र मोदी, सीएम वसुंधरा राजे और कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का पुतला फूंका। कांग्रेस नेताओं ने किसान की मौत को अफसोसजनक बताते हुए पीड़ित के परिवार को मुआवजा देने और लहसुन को समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग की है। 
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किसान को इतना हो रहा है नुकसान

कृषि मंडी में खराब हो रहे लहसुन के बोरे - फोटो : amar ujala
हाड़ौती में इस बार एक लाख 38 हजार हैक्टेयर में लहसुन की बुआई हुई थी, जिसमें तकरीबन 7 लाख 84 हजार मीट्रिक टन लहसुन की पैदावर हुई। संभाग में 4 मंडियां है और दो महीने में इन मंडियों में अभी तक कम भाव के कारण केवल 11 लाख क्विंटल ही लहसुन बिका है।

वर्तमान में लहसुन का औसत भाव 1500 से 2200 रुपए क्विंटल है, जबकि किसानों को 5 हजार रुपए क्विंटल मिलना चाहिए। किसानों का कहना है कि इस भाव से लहसुन बेचने पर उन्हें प्रति बीघा 10 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है।

एक बीघा में लहसुन पैदा करने में किसान के 30 से 35 हजार रुपए खर्च होते है। उचित मूल्य मिलने के इंतजार में किसानों ने 80 से 85 प्रतिशत लहसुन रोक रखा था। भीषण मे गर्मी के चलते वे सूखने लगा है। ऐसे उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। साथ ही किसानों के पास भंडारण की व्यवस्था भी नहीं है।
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