फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दूध-जलेबी खाकर बग्घी खींचने लायक बना यह बकरा

Fri, 01 Sep 2017 07:55 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
विज्ञापन
बग्धी में जुता रहबर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
ये जनाब रोजाना एक किलो दूध पीता है, जलेबी खाता है और एक किलो चने की दाल खाता है। अब एक साल बाद यह  बग्घी खींचने लायक बन गया। 
विज्ञापन


ईद उल अजहा यानी बकरा ईद कल हर्षोल्लास से मनाया जाएगी। इसे लेकर मुस्लिम समाज के लोगो मे खासा उत्साह है। ईद के दिन बकरों की कुर्बानी दी जाती है। अजमेर में एक ऐसे खादिम हैं जो घर में बकरा पाल कर उसकी कुर्बानी देते हैं। अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के खादिम सैयद अब्दुल गनी गुर्देजी 1963 से घर मे बकरे पालकर कुर्बानी के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि मुस्लिम समाज में बकरा पाल कर कुर्बानी करने की फजीलत का शबाब ज्यादा होता है।
विज्ञापन


गनी गुर्देजी ने बताया कि इस बार राजस्थानी देशी मारवाड़ी नस्ल का बकरा मकराना से एक साल पहले खरीदकर लाए, जिसकी कीमत 35 हजार रुपए थी। बकरे को रोजाना सुबह 1 किलो दूध-जलेबी, दोपहर में 20 रुपए का चारा और 1 किलो चने की दाल खिलाई जाती हैं। इस बकरे का नाम रहबर रखा गया। आज रहबर की बग्घी बनाई गई, जिसमें खादिम के पोते और नवासे को बिठाकर ख्वाजा महल से दरगाह बाजार तक सवारी निकाली गई।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें