राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मौखिक रूप से कहा है कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग 14 वर्षीय याचिकाकर्ता बच्चे को अपनी योजनाओं के तहत नियमानुसार सुविधाएं मुहैया कराए। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई 1 फरवरी तक टाल दी है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश ध्रुव जोशी के अपनी मां के जरिये दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में दिए आदेश की पालना में बच्चे की जांच के लिए न्यूरोलॉजी के आचार्य डॉ. बीएल कुमावत और पीएमआर के सहायक आचार्य डॉ. सुनील गोयनका का मेडिकल बोर्ड बना दिया गया है। वहीं बच्चे के पिता ने कहा कि वह अपने वेतन का आधा हिस्सा पत्नी को भेजता है। इसके अलावा उसने बच्चे की अभिरक्षा के लिए फैमिली कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगा रखा है। जिस पर 31 जनवरी को फैसला आ सकता है। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 1 फरवरी को टालते हुए कहा कि बच्चे को सरकार की ओर से संचालित सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
याचिका में अधिवक्ता शालिनी श्योराण ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता फ्रेजाइल एक्स नामक बीमारी से ग्रसित है। उसका पिता सरकारी सेवक हैं, लेकिन उन्होंने याचिकाकर्ता को अलग कर दिया है। याचिका में गुहार की गई कि उसके पिता उसे आवास और मेडिकल सुविधा देते हुए उसकी सामाजिक जिम्मेदारी का वहन करें।