भरतपुर में एनएच—11 पर पंछी का नंगला कस्बे के रेड लाइट एरिया में पुलिस रैड के दौरान लड़कियों के मौत का मामला गरमा गया है। हाईकोर्ट को सरकार ने कहा है कि इस मामले की जांच सरकार ने भरतपुर के सम्भागीय आयुक्त को सौंपी है। सम्भागीय आयुक्त दो महीने में रिपोर्ट पेश करेंगे।
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश केएस झवेरी की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सरकार ने मौखिक जवाब में अदालत को कहा कि पुलिस कार्रवाई में कोई गोली नहीं चली। सरकार ने कहा कि जिस लड़की को तालाब में डूबने से पुलिस ने बचाया है उसने पुलिस के पक्ष में बयान दिए हैं। लड़की मरने वाली लड़कियों में से एक की बहन है। उसका कहना है कि पुलिस ने तो उन्हें तालाब में डूबने से बचाया है।
इस पर कोर्ट ने भी तल्खी दिखाते ही कहा कि यदि समाचार पत्रों में छपी खबरें गलत हैं, तो सम्बंधित समाचार पत्रों पर कार्रवाई की जाए। यदि पुलिस की गलती है, तो पुलिस पर कार्रवाई हो। कोर्ट ने सरकार को 10 अप्रैल तक लिखित जवाब पेश करने को कहा है। गौरतलब है कि मामले में हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर सरकार से जवाब मांगा था।
बताया जा रहा है कि भरतपुर में हुई पुलिस रेड के दौरान मंगलवार को पुलिस से बचने के लिए तीन नाबालिग लड़कियों सत्तो, रचना व पायल ने नजदीक ही गोवर्धन तालाब में छलांग लगा दी थी। जिसमें सत्तो और रचना की तालाब में डूबने से मौत हो गई। जबकि पायल को पुलिस अधिकारी धर्मेंद्र ने छलांग लगाकर बचा लिया था।