लपटों के बीच फटे गैस सिलेंडर और प्रशासनिक लापरवाही ने घर में सो रहे एक परिवार के पांच सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया था। शहर को हिला देने वाली इस घटना के बाद परिजनों का गुस्सा अब तक फूट रहा है।
दरअसल, मकर संक्रांति से एक दिन पहले विद्याधर नगर के सेक्टर 9 स्थित मकान में हुए भीषण अग्निकांड में पांच लोगों की मौत हो गई थी। इसी घटना की जांच करने घटनास्थल पर पहुंची जयपुर नगर निगम की एक संयुक्त कमेटी को आज विरोध का सामान करना पड़ा। मृतकों के रिश्तेदार व परिजनों ने जांच कमेटी में शामिल अफसरों को खरीखोटी सुनाई और उन्हें घर में नहीं घुसने दिया। इससे उन्हें उल्टे पैर लौटना पड़ा।
जानकारी के अनुसार नगर निगम के अतिरिक्त कमिश्नर हरसहाय मीणा, उपायुक्त फायर शिप्रा शर्मा, विद्याधर नगर उपायुक्त कविता चौधरी, उपायुक्त सीएफओ अजमेर जगदीश प्रसाद फुलवारी समेत जांच कमेटी में शामिल अधिकारी आज विद्याधर नगर में सेक्टर 9 निवासी लोहा व्यापारी संजीव गर्ग के घर हादसे की जांच करने पहुंचे थे।
खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि अब यहां क्या जांच करने आए हो
हादसे के वक्त घर के बाहर इकट्ठा भीड़
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टीम के आने की सूचना पर घर में मौजूद संजीव गर्ग के परिजन गेट पर खड़े हो गए। इनमें एक-दो बुजुर्ग रिश्तेदारों व परिजनों ने जांच कमेटी में शामिल अधिकारियों को घर में नहीं घुसने दिया।
उन्होंने खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि अब यहां क्या जांच करने आए हो। यहां तो सब जलकर मर गए। अब क्या करोगे यहां। जांच ही करनी है तो अपने सिस्टम की करो। अपने लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और खराब संसाधनों की करो। जिनकी देरी और लापरवाही की वजह से हमारे घर के निर्दोष सदस्यों की मौत हो गई।
गौरतलब है कि लोहा कारोबारी संजीव गर्ग के मकान में 13 जनवरी की अलसुबह 4 बजे शार्ट सर्किट के बाद घरेलू गैस सिलेंडर में विस्फोट हो गया था।
दादा और चार भाई-बहनों की हुई थी दर्दनाक मौत
मदद को आगे आए पड़ोसी
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हादसे में संजीव के पिता महेन्द्र गर्ग (75), बेटी अर्पिता (22), अपूर्वा (20), बेटा अनिमेष (18) व भांजा शौर्य (20) की मौत हो गई थी। इनमें अनिमेष और शौर्य की बंद कमरे में दम घुटने से मौत हुई थी, जबकि दादा और दोनों पोतियांं जिंदा जल गई थी। यह आग दो मंजिला मकान के निचले हिस्से में लगी थी।
आगजनी के बीच पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने घर में मौजूद लोगों के चीख-पुकार मचाने पर उन्हें बचाने का भी प्रयास किया था। आग इतनी विकराल थी कि मदद के सभी प्रयास बेकार हो गए। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि दमकल की गाड़ियां मौके पर करीब डेढ़ घंटे देर से पहुंची।
फायर ब्रिगेडकर्मी दमकल की सीढ़ियां भी नहीं खोल सके। जिससे हादसा बड़ा हो गया। मामले में 3 फायरकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। जबकि कार्यवाहक सीएफओ जलज घसिया और एक अन्य अधिकारी को नोटिस सौंपा गया था।