राजस्थान हाईकोर्ट ने सामुहिक दुष्कर्म से जुड़े मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि यदि प्रकरण में पीड़िता के बयान झूठे साबित होने पर उसके खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेन्द्रसिंह की ओर से दायर आपराधिक याचिका को खारिज करते हुए दिए। मामले के अनुसार पीडिता ने 26 अप्रैल 2016 को भांकरोटा थाने में सुखदेवसिंह, श्योपालसिंह और विक्रमसिंह सहित अन्य के खिलाफ लंबे समय तक सामुहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके मजिस्ट्रेट के समक्ष हुए बयान में भी पीड़िता ने एफआईआर की बातें दोहराई।
वहीं बाद में पीडिता ने किरन व अन्य के खिलाफ अदालत में अलग से परिवाद पेश किया। जिसमें पीडिता ने अदालत में बयान दर्ज कराए कि उसने इन लोगों के दबाव में आकर भांकरोटा थाने में एफआईआर कराई है। याचिका में कहा गया कि पीड़िता ने राजनीतिक द्वेषता के चलते सुखदेवसिंह व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। ऐसे में उसे रद्द किया जाए। जिसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि प्रकरण में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है। यदि पीडिता ने झूठे बयान दिए हैं तो निचली अदालत को कार्रवाई का अधिकार है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिका खारिज करते हुए बयान झूठे साबित होने पर विधि अनुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।