गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद हफ्तेभर से राजपूत समाज लामबंद होकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इस बीच एक महिला ने अपना पत्र वायरल किया है, जिसमें कहा है कि आनन्दपाल ने जब मेरे पति को गोलियों से छलनी किया था, तब राजपूत समाज कहां था? क्या मैं और मेरा परिवार राजपूत नहीं थे? मुझे कम उम्र में बाल विधवा बना दिया गया?
ये महिला है हिम्मत सिंह राजपूत की पत्नी ममता कंवर। दरअसल, हिम्मत सिंह को आनंदपाल ने गोलियों से भून दिया था। ममता कंवर के नाम से एक मैसेज सोशल साइट्स पर जमकर वायरल हो रहा है।
ममता कंवर ने इस मैसेज में कहा गया है कि मैं महसूस कर सकती हूं कि मृतक आनंदपाल की पत्नी, मां, उनके बच्चे और परिवार पर इस समय क्या गुजर रही होगी व उनकी व्यथा में क्षत्राणी होने के नाते अच्छी तरह समझ सकती हूं। मेरी पूरी सहानुभूति उनकी पत्नी व परिवार के साथ है।
परन्तु मैं मेरे राजपूत भाइयों से निवेदन करती हूं कि क्षत्रिय होने के नाते वे पहले न्याय मेरे परिवार के साथ करे। इसी अपराधी आनंदपाल सिंह और इसकी अपराधी गैंग ने मेरे पति हिम्मत सिंह राजपुरा को बिना गलती के सरेआम अंधाधुंध गोलियों से भून दिया। क्या मैं और मेरा परिवार राजपूत नहीं थे?
शादी के छह माह बाद ही बना दिया बाल विधवा आनन्दपाल ने
आनंदपाल की लाश
- फोटो : amar ujala
मैसेज में अन्य मामलों का जिक्र करते हुए महिला ने आरोप लगाया है क्या दोष था फतेहपुर के उस सरकारी अध्यापक राजेन्द्र सिंह राजपूत का। जिनको आनंदपाल की अपराधी गैंग ने आनंदपाल के कहने पर सिर्फ ढाई लाख रुपए की सुपारी लेकर जान से मार दिया। उसकी पत्नी को शादी के 6 माह बाद ही बाल विधवा बना दिया। उसकी पत्नी और समाज के साथ कौनसा समाज खड़ा था?
आगे लिखा है कि क्या दोष था डीडवाना के श्याम प्रताप सिंह राठौड़ (रूवा) का जिसको आनंदपाल और उसकी गैंग से खतरा था। रूवा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये कहा था कि मुझे आनंदपाल और उसकी गैंग से खतरा है। वो भी राजपूत था। तब भी समाज आगे नहीं आया।
श्याम प्रताप श्री राजपूत करणी सेना में दो बार प्रदेशाध्यक्ष रहा, उन्होंने जब डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में बसपा से विधायक का चुनाव लड़ा, तो इसी आनंदपाल और उसके गैंग ने उसका क्या हाल किया?
एनकाउंटर करनेवाले पुलिसकर्मियों का दिया धन्यवाद
आनंदपाल सिंह।
संदेश में उन राजपूत समाज के पुलिसकर्मियों को धन्यवाद भी दिया गया है। इसमें लिखा है कि मैं उस वीर सोहन सिंह तंवर की वीरता को प्रणाम करती हूं।
उसने क्षत्रिय धर्म निभाया और कानूनी कार्य करते हुए एक अपराधी (आनन्दपाल) को मुठभेड़ में खत्म कर सम्पूर्ण राजपूतों का मान बढ़ाया। जो आज जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा है। क्या वो राजपूत नहीं है?
महिला ने लिखा है कि क्या दोष था लाडनूं थानाधिकारी राजपूत लादूसिंह का, जिसको राजकार्य करते समय खुद आनंदपाल और उसकी गैंग द्वारा गोलियों से भूनने की कोशिश की।
हालांकि महिला ने ये भी लिखा है कि यदि उसकी बातों से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह माफी मांगती है।