सरकारी अफसर बनकर बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलवाने का झांसा देकर लाखों रुपए हड़पने वाली एक गैंग का खुलासा हुआ है। जिसमें शामिल दो मुख्य आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
यह गिरोह जयपुर, राजस्थान समेत अन्य चार राज्यों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से लाखों रुपये ठग चुका है। यह गैंग उत्तर प्रदेश से ठगी की वारदातें करता है। जिसमें शामिल ठग शातिराना तरीके से खुद को सीबीआई और अन्य बड़े सरकारी अफसर बताकर विभिन्न राज्यों में अपने एजेंट बनाकर नेटवर्क तैयार करते है। फिर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवकों से मोटी रकम वसूल करते है।
एसीपी कोतवाली सुमित कुमार ने बताया कि उनियारों का रास्ता चांदपोल निवासी बन्ने सिंह ने रविवार को नाहरगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। जिसमें बन्ने सिंह ने उत्तरप्रदेश के रहने वाले डॉ. रजनीश कुमार यादव, रवींद्र सिंह, दिनेश जोशी और मनीष पर ठगी कर 14 लाख रुपए हड़पने का आरोप लगाया था।
परिवादी भी ठगी के केस में गिरफ्तार हो चुका है
रवींद्र सिंह
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इनमें डॉक्टर रजनीश यादव पिछले महिने ही कोतवाली थाना, जयपुर नार्थ में गिरफ्तार हुआ था, जबकि आरोपी रविंद्र सिंह को नाहरगढ़ थाना पुलिस ने तिहाड़ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। इससे पहले परिवादी बन्नेसिंह भी नौकरी के नाम पर ठगी के केस में गिरफ्तार हो चुका है।
गत मई माह में चांदपोल निवासी महिला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्लर्क के पद नौकरी लगाने का झांसा देकर 13 लाख रुपए हड़पने का केस कोतवाली थाने में दर्ज करवाया था। जिसमें परिवादी बन्नेसिंह कुशवाहा समेत रमेशचंद बैरवा, अशोक टेलर व महेंद्र अग्रवाल रुपए हड़पने का आरोप लगाया।
कोतवाली पुलिस को पूछताछ में गिरफ्तार बन्नेसिंह व अन्य आरोपियों ने बताया था कि वे एक कंपनी के स्थानीय एजेंट है। गैंग के सरगना यूपी में डॉ. रजनीश कुमार यादव, रविन्द्र कुमार, दिनेश जोशी व मनीष है, जो कि सरकारी नौकरी लगाने के बहाने लाखों रुपए वसूलते है। इस मुकदमे में जमानत मिलने पर बन्ने सिंह ने यूपी की गैंग के इन सरगनाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया।
खुद को एफसीआई, सीबीआई अधिकारी बताकर फंसाते थे
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जिसमें बताया कि वह पिछले साल जुलाई में यूपी निवासी आरोपी दिनेश जोशी से मिला था। तब दिनेश ने खुद को एफसीआई यूनियन का पदाधिकारी बताकर एफसीआई में सुपरवाइजर बनाने के नाम पर 14 लाख रु. लिए थे। नौकरी नहीं लगने पर पीड़ित ने दबाव बनाया तब उसे कानपुर बुलाकर एक फर्जी ज्वॉइनिंग लैटर दे दिया।
ये आॅफिस के बजाए सड़क पर किसी निश्चित जगह पर मिलते है। फर्जी ज्वाइनिंग लैटर देकर मोटी रकम वसूल कर लेते है। बेरोजगार को फंसाने के लिए इसी गैंग के कुछ लोग इनसे मिलकर नौकरी दिलवाने पर शुक्रिया अदा करते है, ताकि बेरोजगार को यकीन हो जाए।
नाहरगढ़ थानाप्रभारी भंवरलाल ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल करवाकर पास करवाने की एवज में मोटी रकम हड़पने के मामले में मनीष को यूपी एसटीएफ भी गिरफ्तार कर चुकी है। इन आरोपियों ने अन्य सरगनाओं के नाम बताए तब डॉक्टर रजनीश पूनियां को 5 नवंबर को गिरफ्तार किया। वहीं, दूसरा आरोपी रविन्द्र दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार हो चुका है। पूछताछ के लिए तिहाड़ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार लिया।