प्रदेश की राजधानी जयपुर के रामगंज इलाके में हुए उपद्रव के वक्त दिव्यांग भरत कोडवानी की मौत के मामले में नया मोड़ सामने आया है। उसके चाचा तोलाराम ने रामगंज थाने में आज हत्या का एक मुकदमा दर्ज करवाया।
जिसमें रामगंज हिंसा में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भरत की हत्या करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि 28 वर्षीय दिव्यांग भरत अपनी बुजुर्ग मां का इकलौता सहारा था। वह ई रिक्शा चलाकर घर का गुजर बसर करता था।
पिछली शुक्रवार रात को रामगंज में हुई हिंसा के दौरान वह रामगंज बाजार में ई-रिक्शा में अचेत पड़ा मिला था। तब माणकचौक थाना पुलिस ने भरत को एसएमएस अस्पताल पहुंचाया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
थानाप्रभारी गंगवानी की पहल पर एक लाख की आर्थिक मदद
भरत की मौत के बाद बिलखती मां व बहन
- फोटो : Vishnu Sharma
भरत के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने भरत की मौत को तीन दिन तक दबाए रखा और उपद्रव में गोली लगने से मौत का शिकार हुए आदिल के शव के दफनाने के बाद भरत के परिजनों को उसकी मौत की सूचना दी। जिससे हिंदू संगठनों और सिंधी समुदाय में आक्रोश व्याप्त हो गया था। उन्होंने भरत की मां को आर्थिक मुआवजा देने की मांग की थी।
वहीं, दिव्यांग भरत कोडवानी के परिजनों को जयपुर के जवाहर नगर थानाप्रभारी जितेंद्र गंगवानी की पहल पर सिंधी समाज के युवाओं की ओर से एक लाख रूपये की धनराशि इकट्ठा कर उसकी 65 वर्षीय मां को दी। भरत की मौत के बाद अब परिवार में उसकी मां के भरण पोषण को लेकर संकट खड़ा हो गया था।