राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव, पंचायती राज सचिव और शिक्षा निदेशक सहित अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि पेराटीचर्स, शिक्षाकर्मी और मदरसा टीचर्स को तृतीय श्रेणी अध्यापक के समान वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश कौशल्या नागदा की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिककर्ता दस सालों की अवधि से अधिक समय से पेराटीचर, शिक्षाकर्मी व मदरसा टीचर पद पर काम कर रहे हैं। इसके बावजूद न तो उन्हें नियमित किया जा रहा है और न ही तृतीय श्रेणी अध्यापक के समान वेतन दिया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।