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4 साल में तैयार होगी 42 हजार करोड़ की अॉयल एंड गैस रिफाइनरी, हुआ करार

Tue, 18 Apr 2017 05:09 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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रिफाइनरी - फोटो : अमर उजाला
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बाड़मेर में स्थापित होने वाली अॉयल एंड गैस रिफाइनरी देश की पहली ईको फ्रेंडली रिफाइनरी होगी। रिफाइनरी को लेकर राजस्थान सरकार, केन्द्र सरकार व एचपीसीएल के बीच एमओयू मंगलवार को होटल हिल्टन में हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान सहित पांच विभागों के मंत्री व एचपीसीएल के चेयरमैन मौजूद थे।
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कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस रिफोइनरी का इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया में सबसे बेहतर होगा। भारत में अब तक 20 से अधिक अॉयल एंड गैस रिफाइनरी हैं। राजस्थान में स्थापित होनेवाली रिफाइनरी चार वर्ष में तैयार हो जाएगी। इस रिफाइनरी से कोटा शहर तक पाइपों के द्वारा एलपीजी गैस पहुंचाई जाएगी, जिससे गैस का वितरण घरों तक पाइपों के द्वारा हो सके। इस कदम को प्रदूषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्यक्रम में वसुंधरा राजे ने कहा कि रिफाइनरी चार साल से हमारी सरकार का सपना रहा है। विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाना चाह रहा था। अब ये मुद्दा उनसे छिन चुका है। अभी तक भारत में बीएस-3 व बीएस-4 मानकों पर आधारित रिफाइनरीज हैं, लेकिन राजस्थान में स्थापित होनेवाली रिफाइनरी बीएस-6 मानकवाली होगी।
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गौरतलब है इस रिफाइनरी के लिए पिछले माह ही राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री ने नए प्रस्तावों के साथ एचपीसीएल के साथ एमओयू साइन करने की घोषणा की थी। जिसके बाद पचपदरा में प्रस्तावित रिफाइनरी के मूर्त रूप लेने की संभावनाओं को बल मिला था।

इस रिफाइनरी के लिए एचपीसीएल बोर्ड ने मार्च 2013 में मंजूरी दी थी। रिफाइनरी को लेकर राजस्थान में राजनीतिक माहौल गरम रहा है।

विशेष होगी पचपदरा की रिफाइनरी

रिफाइनरी - फोटो : अमर उजाला
पचपदरा में बनने वाली रिफाइनरी करीब 42 हजार करोड़ की लागत से तैयार होगी। सरकार के अनुसार नए एमओयू के साइन होने के बाद राज्य सरकार पर लागत का भार करीब 16 हजार 845 करोड़ रुपए आएगा। यह रिफाइनरी करीब 90 लाख टन क्षमता की होगी। इस रिफाइनरी में 30 साल तक उत्पादन होगा। उत्पादन के दौरान राज्य करीब 34 हजार करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। राजस्थान सरकार के लिए वित्तीय लिहाज से नया एमओयू सीधे तौर पर 39195 करोड़ रुपए का फायदा करवाएगा। इसमें एचपीसीएल को 15 वर्ष तक दिए जाने वाले ब्याज मुक्त ऋण की राशि का अहम स्थान है।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थान विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान कह चुकी हैं कि नए मसौदे से वित्तीय भार बेहद कम होगा। इन वर्षों में रिफाइनरी की लागत बढ़ने बावजूद वित्तीय भार दो तिहाई घटकर करीब 20583 करोड़ रुपए रह जाएगा।

भाजपा सरकार के अनुसार पिछली कांग्रेस सरकार के एमओयू से ताजा एमओयू के जरिए 2 तिहाई वित्तीय भार घटेगा, जो 56040 करोड़ रुपए से घटकर 16845 करोड़ रुपए होगा।

रिफाइनरी से निकलने वाले पेटकॉक से बनेगी 250 मेगावॉट बिजली। जिसमें केयर्न एनर्जी से उत्पादित तेल रिफाइन किया जाएगा। साथ ही बाहर से आयातित तेल को भी इसमें रिफाइंड किया जाएगा।
इस रिफाइनरी से प्रदेश के 14 जिले सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार रिफाइनरी लगने के बाद प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से करीब 30 हजार लोगों को लाभ मिलेगा। साथ ही रिफाइनरी के साथ इस क्षेत्र में अन्य पेट्रो केमिकल यूनिट भी लग सकती है जिनसे भी रोजगार का सृजन होगा।
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​ऐसी रही है राजस्थान में रिफाइनरी की राह

रिफाइनरी
— साल 2005 में रिफाइनरी का ऐलान हुआ। शुरुआत में लागत 12 हजार करोड़ लगाई गई। पर समय के साथ इसकी अनुमानित लागत 42 हजार करोड़ हो गई।

— एक उच्च स्तरीय टीम ने रिफाइनरी को लीलाणा में लगाने के लिए चयन किया। टीम के इस फैसले का स्थानीय काश्तकारों ने विरोध किया।

—  जिसके बाद यह फैसला फिर से बदल दिया गया। साल 2013 में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले तय हुआ कि राजस्थान में प्रस्तावित रिफाइनरी बाड़मेर के पचपदरा में ही लगेगी।

—  वहां उपलब्ध 28000 बीघा में से दो गांवों की 11000 बीघा जमीन ली जाएगी। इसमें एक कोने में आ रही 5 काश्तकारों की 100 बीघा जमीन को भी छोडऩे का फैसला किया गया। 

— वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले गहलोत सरकार ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से रिफाइनरी का शिलान्यास करवाया।
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