लोकसेवकों को बचाने वाला बिल आज राजस्थान विधानसभा में पेश हो सकता है। जानकारी के अनुसार इस विधेयक को राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया आज सदन में पेश करेंगें। इस विवादित बिल को लेकर राजे सरकार देशभर के मीडिया के साथ विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस इस बिल के विरोध में विरोध प्रदर्शन कर रही है। वहीं आम आदमी की नाराजगी बिल के विरोध में सोशल मीडिया पर दिख रही है।
दरअसल सरकार के नए तुगलकी बिल के अनुसार अब राजस्थान में सांसद-विधायक, जज और अफसर के खिलाफ मामला दर्ज करवाना अब आसान नहीं होगा। इनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने से पहले सरकार से इजाजत लेनी होगी।
उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान
फाइल फोटो।
इस प्रस्तावित बिल के अनुसार, ड्यूटी के दौरान यदि नौकरशाहों के खिलाफ कोई शिकायत है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी है, तो उसके लिए पहले राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी। इस बिल में 180 दिन की समयावधि भी रखी गई है।
बिल के मसौदे के अनुसार यदि सरकार की स्वीकृति से पूर्व आरोपी कर्मचारी या अधिकारी का नाम मीडिया रिपोर्ट्स में आता है, तो ऐसे मामलों में दो वर्ष की सजा का प्रवाधान है।
मीडिया रिपोर्ट्स में आरोपी का नाम सरकार की अनुमति के बाद ही आ सकता है। इस बिल में 180 दिन की समयावधि भी रखी गई है। इसके अनुसार शिकायत होने के बाद सरकारी कर्मचारी या अन्य लोगों के खिलाफ सरकार 180 दिन में निर्णय लेगी। तय समयावधि के बाद अगर कोई निर्णय नहीं आता है, तो सबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोर्ट के जरिए ही रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है।
वापसी के मूड में नहीं
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प्रस्तावित बिल को सोशल मीडिया पर भी जमकर ट्रोल किया जा रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्विटर पर इसे राजशाही का नमूना बताया है। आप के कुमार विश्वास ने भी इसका विरोध किया है। स्वयंसेवी संस्था पीयूसीएल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है।
उधर, राजस्थान के पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने सफाई दी है कि नौकरशाहों के खिलाफ इस्तगासे के जरिए झूठी शिकायतों की बाढ़ आ गई है, जिससे नौकरशाह विकास के काम नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि इस बिल का मुख्य मकसद नौकरशाहों को बदनाम करने से रोकना है न कि मीडिया पर सेंसरशिप लगाना।
इधर, गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि ईमानदार अधिकारी काम करने से डरते हैं कि कोई उन्हें केस में न फंसा दे। साफ छवि के अधिकारियों को बचाने के लिए ये बिल लाया जा रहा है।