राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 सप्ताह से अधिक की गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता को सशर्त गर्भपात कराने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि एमटीपी एक्ट, 1971 के तहत गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए।
अदालत ने बोर्ड को कहा है कि वह तीन दिन में मेडिकल जांच कर रिपोर्ट दे कि गर्भपात संभव है या नहीं। रिपोर्ट के बाद ही तय होगा कि गर्भपात कराया जा सकता है या नहीं? न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश पीड़िता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में दुष्कर्म पीड़िता ने 12 सप्ताह का भ्रूण बताते हुए गर्भपात की अनुमति चाही थी, लेकिन धौलपुर सीजेएम अदालत से अनुमति नहीं मिलने पर मामला हाईकोर्ट लाया गया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि एमटीपी एक्ट के तहत मेडिकल आधार पर गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मेडिकल बोर्ड गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।