देश की रक्षा के लिए अपने सीने पर नौ गोलियां खाने वाले कोटा निवासी चेतन चीता का जज्बा अभी भी कायम है। चेतन ने कोबरा टीम में शामिल होकर फिर से देश सेवा की इच्छा जताई है।
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में चेतन चीता ने बताया कि वह कश्मीर वापस जाने और वहां की सेवा करने के लिए तैयार हैं। घाटी की स्थिति और पत्थरबाजी की बढ़ती घटनाओं के बारे में उनका मानना है कि कश्मीरी युवा गुमराह हैं। उन्हें सही तरीके से समझाकर रास्ते पर लाने की जरूरत है। चीता ने कहा कि वह कोबरा(कमांडो बटालियन फॉर रिज़ोल्यूट एक्शन) बटालियन में शामिल होना चाहते हैं। बातचीत के दौरान चेतन से जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा गया कि तो उनका कहना था कि यदि मैं नौ गोलियां लगने के बाद भी आपके सामने जिंदा हूं तो इसका मतलब है कि अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ। मुझे देश के लिए अभी भी बहुत कुछ करना है।
उन्होंने एक किस्से का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि जब मुझसे मेरी पोस्टिंग के बारे में पूछा गया तो उनका एक ही जवाब था कि उन्हें कश्मीर में ही पोस्टिंग दी जाए।
गौरतलब है कि चेतन चीता कोटा के रहने वाले हैं और उनकी पूरी शिक्षा यही हुई। कोटा के सेंटपाल स्कूल से 1991 में पास आउट होने के बाद वहीं गवर्नमेंट कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। उनके पिता अभी कोटा में ही रहते हैं। जबकि चेतन पति उमा और बेटे दुष्यंत व बेटी रिनय के साथ दिल्ली में रहते हैं।
सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन के कमांडिंग आॅफिसर चेतन कुमार चीता ने 14 फरवरी को बांदिपुरा के हजिन क्षेत्र के पैरे मोहल्ला में अपनी टीम का नेतृत्व किया था। इस दौरान आतंकी मुठभेड़ में उन्हें 9 गोलियां लगी। इसके बावजूद चेतन दुश्मनों से लड़ते रहे। इसी जज्बे की बदौलत चेतन चीता ने लश्कर—ए—तैयबा के आतंकी अबू हारिस को ढेर कर दिया था। हालांकि, इस हमले में तीन जवान शहीद हो गए थे।