बोन मैरो जागरूकता शिविर में ओरल माउथ स्वाब्स की जांच करते हुए फाउंडेशन की संस्थापक सिमी सिंह।
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ल्यूकेमिया की बीमारी से पीड़ित अपने बेटे को खोने वाली दिल्ली निवासी ‘द अर्जन वीर फाउंडेशन’ की संस्थापक सिमी सिंह बुधवार को जयपुर में थी। सिंह बोन मैरो डोनेशन के बारे में जागरूकता लाने एवं डोनर्स का रजिस्ट्रेशन करने के लिए जयपुर आई थी।
जयपुर के शहीद अमित भारद्वाज मेमोरियल पार्क में आयोजित एक बोन मैरो डोनेशन कैंप में लोगों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट से संबंधित तथा ल्यूकेमिया जैसी जानलेवा बीमारियों एवं अन्य आनुवंशिक विकारों के इलाज में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी।
इस जागरूकता कार्यक्रम के बारे में बताते हुए सिंह ने बताया कि ‘डोनर्स के गॉल के अंदर से सैंपल सैल लेने के लिए ओरल माउथ स्वाब्स का उपयोग किया जाता है। इसके बाद ये सैम्पल डीएनए विश्लेषण एवं वर्ल्ड मैरो डोनर्स एसोसिएशन (डब्ल्यूएमडीए) में पंजीकरण के लिए अमेरिका की प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं। डब्ल्यूएमडीए बोन मैरो के लिए रजिस्ट्रेशन संस्थान है जो अस्पतालों को रोगियों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान मैचिंग का जीन ढूंढने में मदद करता है।
सिमी सिंह ने सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य की शुरुआत करने के पीछे की कहानी सुनाते हुए बताया कि दो साल पहले उन्होनें ल्यूकेमिया से पीड़ित अपने स्वर्गीय बेटे अर्जन सिंह की याद में ’द अर्जन वीर फाउंडेशन’ की स्थापना की थी जिनका इस बीमारी के कारण निधन हो गया था। इस फाउडेशन की स्थापना उन सभी लोगों की मदद के उद्देश्य से गई थी जो किसी भी प्रकार के रक्त विकार से पीड़ित हों या जिन्हें बीएमटी की जरूरत हो।
इस फाउंडेशन द्वारा बीमार व्यक्ति के मैच के एचएलए की तलाश में मदद की जाती है और रोगियों एवं उनके परिवारजनों को परामर्श दिया जाता है। वर्तमान में 'द अर्जन वीर फाउंडेशन' के पास 12,000 ऐसे भारतीयों का डेटाबेस उपलब्ध है जो कि इस बीमारी से पीड़ित हैं। जयपुर में यह कैम्प दूसरी बार आयोजित किया गया जिसमें करीब 60 डोनर्स ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया।