भाजपा राजस्थान में 2018 के विधानसभा और 2019 के चुनाव में मौजूदा पदाधिकारियों को टिकट नहीं देने की घोषणा की है। पार्टी ये चुनाव पोस्टरबाजी की बजाय सोशल मीड़िया के जरिए लड़ेगी।
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक सोमवार को जोधपुर में संपन्न हुई। इसमें आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने की रणनीति पर मंथन किया गया। विधानसभा चुनाव—2018 के मिशन 180 तय किया गया है। बैठक में तय किया गया है कि इन चुनाव में संगठन के पदाधिकारियों को टिकट नहीं दिया जाएगा। जिला अध्यक्षों और जिला प्रभारियों की जिम्मेदारी प्रत्याशियों के चयन एवं सरकार की योजनाओं को जनता के बीच ले जाने की रहेगी। इस संबंध में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी को कहना है कि इनकी जिम्मेदारी चुनाव लड़ाने की रहेगी।
पोस्टरबाजी का गया जमाना, सोशल मीडिया पकड़ो
पोस्टरबाजी का गया जमाना
भाजपा कार्यसमिति की बैठक में तय किया गया है कि वर्ष 2018 में विधानसभा और 2019 में लोकसभा चुनाव पोस्टरबाजी की बजाय सोशल मीडिया से लड़ा जाएगा। इसके लिए मंत्रियों, विधायकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला पदाधिकारियों एवं प्रभारियों को सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए लक्ष्य तय किया है।
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को बूथ तक पहुंचाने के लिए 11—11 युवाओं की टीम बनाई जाएगी। जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को फेसबुक, व्हाट्स एप और ट्विटर पर अधिक से अधिक फॉलोअर्स बनाए जाएंगे। हर मंत्री को अपना फेसबुक पेज बनाना होगा और उसे कम से कम 20 लाख फॉलोअर बनाना होगा।
केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी, अब तक हुए कामों की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाई जाएगी। मंत्रियों को अधिकारियों के कामकाज पर निगरानी रखने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बैठक में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री वी. सतीश, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना, राज्यसभा सांसद ओम माथुर, प्रदेश सह प्रभारी गोपाल शेटटी,राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्द्र यादव सहित कार्यसमिति के अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।