नए शिक्षा सत्र को शुरू हुए एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है। छुट्टियां भी समाप्त होने को है और स्कूल फिर से खुलने वाले है। दूसरी तरफ स्कूलों में कक्षा 10 और 12 कि किताबें उपलब्ध कराने में शिक्षा विभाग नाकाम साबित हो रहा है।
विद्यार्थियों के साथ ही शिक्षकों ने भी शिक्षा विभाग की इस ढिलाई का विरोध हो रहा है। इस मामले में एक तथ्य ये भी है कि ये किताबे बाजार में प्रिंट रेट पर आसानी से उपलब्ध हो रही है। जबकि शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में ये किताबें फ्री देता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी स्कूल खुलने के बाद बिना किताबों के पढ़ाई कैसे करेंगे, यह बड़ा सवाल सामने है। खासकर दसवीं और बारहवीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा होने के चलते विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर संजीदा रहते हैं।
शिक्षक संगठनों ने विभाग से जल्द से जल्द किताबें स्कूल में पहुंचाने की मांग की है। राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शशि भूषण शर्मा ने शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर 19 जून से पूर्व प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयो मे पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। शर्मा का कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों में हम गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा तथा उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम वास्तव में लाना चाहते हैं तो सरकार को सभी सुविधाएं समय पर उपलब्ध करानी होंगी ।
संगठन के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने का कहना है कि विद्यालयों में अब तक किताबें नहीं पहुंचना एक सुनियोजित तरीके से मिलीभगत कर बाजार माफिया को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया हैं। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।