बता दें कि राहुल की यात्रा ने 4 दिसंबर को झालावाड़ जिले से राजस्थान में प्रवेश किया था। राजस्थान में पैदल यात्रियों ने 521 किलोमीटर का सफर तय किया। अंतिम दिन यानी 20 दिसंबर को राहुल ने अलवर के मालाखेड़ा में सभा को संबोधित किया। इस दौरान राहुल गांधी ने राजस्थान के मंत्रियों को टास्क सौंपा है। राहुल ने मंत्रियों को हर महीने 15 किलोमीटर पैदल चलने का सुझाव दिया है। राहुल के इस सुझाव को मंत्रियों के जनता से संवाद नहीं करने से जोड़कर देखा जा रहा है।
यात्रा के प्रवेश से पहले राजस्थान कांग्रेस में मचा था घमासान
वहीं भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान में प्रवेश करने से पहले प्रदेश में सियासी घमासान मचा हुआ था। गहलोत और पायलट गुट एक दूसरे पर जमकर जुबानी हमला बोल रहे थे। भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान में प्रवेश से पहले केसी वेणुगोपाल ने गहलोत और पायलट के साथ मीटिंग ली। जिसके बाद दोनों की खींचतान पर विराम लगा। पिछले 15 दिन से राजस्थान कांग्रेस में मचा सियासी तूफान शांत था। हालांकि, राहुल की यात्रा में सचिन पायलट के समर्थन में जमकर नारेबाजी देखने को मिली।
यात्रा के दौरान पोस्टर विवाद
राहुल की यात्रा में 'हमारा नेता कैसा हो, सचिन पायलट जैसा हो' जैसे नारे सुनने को मिले। इससे पहले गहलोत और पायलट समर्थकों में पोस्टर विवाद देखने को मिला था। झालावाड़ में पोस्टर पर राहुल के साथ सिर्फ सचिन पायलट नजर आ रहे थे। कहीं गहलोत की तस्वीर लगाई भी गई तो छोटी सी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। पायलट समर्थकों ने गहलोत समर्थकों पर सचिन पायलट का पोस्टर फाड़ने और जलाने का भी आरोप लगाया था।
राहुल ने बंद कमरे में की मीटिंग
कहा जा रहा है कि अब राहुल गांधी ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद कम करने को लेकर अलवर के सर्किट हाउस में बैठक ली। बंद कमरे में करीब डेढ घंटे तक चली बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और कुछ चुनींदा मंत्री मौजूद रहे। सूत्रों के माने तो कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने गहलोत और पायलट को शांत रहने की सख्त हिदायत दी है। कहा जा रहा है कि राहुल ने कहा कि जो पार्टी के लिए मेहनत करेगा, उसे मेहनत का फल जरूर मिलेगा। कौन क्या कर रहा है, यह सबको पता है। हर काम और भावी रणनीति की रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान के पास पहुंच जाती है। ऐसे में किसी को भी बार-बार बताने की जरूरत नहीं है। जो पार्टी के लिए काम करेगा, पार्टी उसे आगे और अच्छा काम करने का मौका देगी।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की विदाई हो गई है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या राहुल गांधी सचिन पायलट और गहलोत की लड़ाई को खत्म करने में कामयाब हो गए हैं या यात्रा के कारण दबा सियासी बवंडर एक बार फिर उठेगा।