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3 वर्षीय मासूम को त्याग करोड़पति माता-पिता बने सुमित मुनि व साध्वी श्रीजी

Tue, 26 Sep 2017 11:02 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
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दीक्षा लेकर सांसारिक जीवन का त्याग करना यह भरतीय परंपराओं में शामिल रहा है। एेसा ही कुछ यहां देखने को मिल रहा है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ की रहने वाली अनामिका ने भौतिक सुख के साथ अपनी तीन वर्षीय मासूम बच्ची का भी त्याग कर दिया है।
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अनामिका से साध्वी श्रीजी के रूप में नई पहचान से पूर्व उन्होंने सभी कानूनी अड़चनों को पार करते हुए हजारों लोगों की मौजूदगी में सूरत में दीक्षा ग्रहण की। अनामिका के पति भी इसी माह की 22 तारीख को दीक्षा ग्रहण कर सुमित मुनि बन चुके हैं।

हालांकि अनामिका को भी उसी दिन दीक्षा लेनी थी, लेकिन मासमू बच्ची को देखते हुए समाज व कानून की अड़चन के चलते वह दीक्षित नहीं हो सकी थी। लेकिन सोमवार सुबह करीब आठ बजे उन्होंने जैन आचार्य रामलाल से दीक्षा ग्रहण की।
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सुबह केश लोचन और सफेद वस्त्र धारण के साथ सामायिक वाचन के साथ दीक्षा प्रक्रिया पूर्ण हुई। इस दौरान उनके पति रहे अब मुनि बन चुके सुमित भी उपस्थित रहे।
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कानूनी अड़चन दूर होने का दावा

फाइल फोटो।
अनामिका के साथ सोमवार को रायपुर के आदर्श धारीवाल ने भी दीक्षा ली। आदर्श रायपुर के एक बड़े बिल्डर के पुत्र हैं। उन्होंने महज 18 वर्ष की आयु में वैराग्य के पथ को चुना है। इस मामले में सुभाष पगारिया, महामंत्री, श्री साधुमार्गी जैन श्रीसंघ, सूरत ने कहा ''संघ ने कानूनी अड़चन को दूर किया।


शिकायतकर्ता रिश्तेदार ने भी शिकायत वापस लेने के साथ समाज के समक्ष क्षमा-याचना की है। इसके बाद आचार्यश्री ने अनामिका जी को दीक्षित किया। यदि इसके बाद भी कोई कानूनी अड़चन या परेशानी आएगी तो श्री संघ विधिक माध्यम से पक्ष रखेगा। 
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