राजस्थान विधानसभा के एक और सदस्य पर सदस्यता का संकट मंडरा रहा है। ये हैं सपोटरा से चुनकर आने वाले कांग्रेस विधायक रमेश मीणा। बिना नोटिस के केबिनेट मंत्री किरण माहेश्वरी पर भ्रष्टाचार के व्यक्तिगत आरोप लगाने के बाद रमेश मीणा ने सदन की कार्यवाही की जानकारी मीडिया को दे दी थी। सदन की कार्यवाही की जानकारी बाहर देने के कारण संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने गुरुवार को सदन में रमेश मीणा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव रखा है। साथ ही, कांग्रेस के सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा ने राठौड़ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव मंजूर करने की मांग की।
विधानसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने के दौरान राजेंद्र राठौड़ ने रमेश मीणा की सदस्यता समाप्त करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि मीणा ने सदन की कार्यवाही को सार्वजनिक किया है। मीणा ने नियम 273 के तहत नोटिस देकर माहेश्वरी पर आरोप लगाए थे। आरोपों और मंत्री के जवाब को उपाध्यक्ष ने फ्रीज किया था, लेकिन इसके बावजूद मीणा ने सदन के बाहर कार्यवाही को सार्वजनिक किया। विधानसभा उपाध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह ने कहा आसन के निर्देशों की पालना नहीं की गई। सदन का उपयोग जनहित के लिए होना चाहिए। इस विशेषाधिकार हनन पर आसन का फैसला कठोर आएगा।
कांग्रेस के सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा माहेश्वरी पर सदन में व्यक्तिगत आरोप लगाने से पहले रमेश मीणा ने अध्यक्ष और मंत्री किरण माहेश्वरी को नोटिस दिया था। रमेश मीणा ने चिट्ठी किरण माहेश्वरी को दिन में 1.30 बजे दी। यह चिट्ठी 27 मार्च को ही मौजूदा जलदाय मंत्री को जवाब तैयार करने के लिए दी। मंत्री सदन में मौजूद हो तो आरोप लगाए जा सकते हैं, नोटिस की जरूरत नहीं है। हालांकि नोटिस की पावती सदन में रख दी है।
डोटासरा ने कहा कि खुद संसदीय कार्यमंत्री राजेंन्द्र राठौड़ और कई नेता सदन की कार्यवाही के बारे में मीडिया से बात करते आए हैं। सदन की कार्यवाही के बारे में मीडिया से बातचीत में रोक नहीं लगे। यह विधायकों की स्वतंत्रता का मामला है। रमेश मीणा ने आसन की व्यवस्था का उल्लंघन नहीं किया। मीणा ने फ्रीज कार्यवाही का कोई अंश मीडिया को नहीं बताया। डोटासरा ने राठौड़ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव मंजूर करने की मांग की।
गौरतलब है कि मीणा ने मंगलवार को प्रदेश सरकार में किरण माहेश्वरी पर व्यक्तिगत आरोप लगाए गए थे। कांग्रेस विधायक ने मंगलवार को माहेश्वरी पर सदन में भ्रष्टाचार के आरोप जमकर आरोप लगाए और कहा कि व्यवस्था के तहत उन्होंने एक दिन पूर्व ही मंत्री को नोटिस दे दिया था। मंत्री का कहना था कि विधायक ने उन्हें कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया है। विधायक मीणा ने पास भी मंगलवार को नोटिस सम्बंधी कोई दस्तावेज नहीं था। सदन ने इस कार्यवाही को फ्रीस किया था और मीणा को गुरुवार को नोटिस देने के सबूत रखने को कहा।
इससे पूर्व धौलपुर विधायक बी.एल. कुशवाह को हत्या के एक मामले में सजा होने के बाद राजस्थान विधानसभा से उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। इस कारण धौलपुर में नौ अप्रेल को उपचुनाव होने जा रहें है।