भारत-पाक युद्ध में अहम किरदार निभाने वाली 10 पैरा विशेष बटालियन ने अपनी स्थापना के 50 साल पूरे होने पर स्वर्ण जयंति समारोह मनाया। बटालियन ने पाक से लोहा लेने वाले शहीदों को भी याद किया।
स्वर्ण जयंति के इस गौरवशाली अवसर को यादगार बनाने के लिए 10 पैरा विशेष बटालियन में कार्यरत और रिटायर्ड अधिकारियों,जूनियर कमीशन,अधिकारियों और बटालियन के जवानों ने जोधपुर मिलिट्री स्टेशन में एकसाथ इक्कट्ठे होकर बटालियन के अमर वीर बलिदानी शहीदों को याद किया। दसवी छाताधारी बटालियन भारतीय सेना में 'स्कॉर्पियन' नाम से विख्यात है। इस बटालियन ने अपनी स्थापना के बाद से ही बेजोड़ साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए सभी बड़े युद्धों अभियानों में हिस्सा लिया और युद्ध क्षेत्र में बहुत यश और सम्मान प्राप्त किया। पिछले 50 सालों में भारतीय सेना की इस स्पेशल बटालियन ने वर्ल्ड क्लास स्पेशल फोर्स की श्रेणी में अपने आपको स्थापित किया है।
फोर्स की उपलब्धियां:
रेगिस्तानी इलाकों में स्पेशल आॅपेरशन के लिए 1 जून 1967 को 10 पैरा कमांडो की स्थापना की गई।
बटालियन ने 1971 के भारत पाक युद्ध में तत्कालीन लेफ्टिनेंट कर्नल और महावीर चक्र विजेता भवानी सिंह के नेतृत्व में सिंध प्रांत के छाछरो में रेड मारकर बहादुरी और पराक्रम का परिचय दिया।
बटालियन के पराक्रमों को देखते हुए सरकार ने इस बटालियन को 'युद्ध सम्मान छाछरो' और 'थिएटर सम्मान सिंध'के साथ अनेक युद्ध सम्मानों से विभूषित किया गया।
बल ने भारत में ही नहीं बल्कि विदेशी जमीनों पर भी स्पेशल आॅपरेशनों में भाग लिया है।
बटालियन ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान आॅपेरशन विजय में अदम्य साहस दिखाते हुए 'थिएटर सम्मान कारगिल प्राप्त किया।
इस युनिट को अपनी बहादुरी के लिए 2 अशोक चक्र,3 कीर्ति चक्र,8 वीर चक्र,9 शौर्य चक्र और 52 सेना मेडल मिल चुके हैं।