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भारत लौटना चाहता है जाकिर नाईक, सुप्रीम कोर्ट के आगे रखी शर्त

Fri, 10 May 2019 01:44 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जाकिर नाईक (फाइल फोटो)
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विवादस्पद इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक भारत लौटना चाहता है। इसके लिए उसने शर्त रखी है। नाईक का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उसे यह भरोसा दिलाए कि दोषी पाए जाने तक उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तो वह देश लौटने को तैयार है।

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नाईक फिलहाल मलयेशिया में रह रहा है और मुस्लिम बहुल इस देश ने उसे नागरिकता दे रखी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और जैसी भारतीय एजेंसियां नाईक को तलाश रही हैं। उस पर मनी लांड्रिंग के अलावा गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं। नाईक ने 2016 में भारत छोड़ दिया था। 

‘द वीक’ नाम की एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में नाईक ने भारतीय न्याय व्यवस्था पर विश्वास जताया। हालांकि, मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उसने कहा, ‘पहले की न्याय व्यवस्था आज से बेहतर थी। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने से पहले आप सरकार के खिलाफ बोल सकते थे। इतना ही नहीं, न्याय पाने की दर 80 फीसदी थी। आज 10 से 20 फीसदी रह गई है। 
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अतीत पर गौर करें तो आप पाएंगे कि आतंकवाद के आरोपों का सामना कर रहे 90 फीसदी मुस्लिम 10 से 15 साल बाद कोर्ट से बरी कर दिए जाते हैं। इसलिए मुझे भी न्याय पाने के लिए दस साल जेल में बिताने होंगे और मेरा पूरा मिशन बर्बाद हो जाएगा। इसलिए मैं ऐसी गलती नहीं कर सकता। अगर सुप्रीम कोर्ट मुझे भरोसा दिलाए कि दोषी पाए जाने तक मुझे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा तो मैं देश लौटने को तैयार हूं।’ 

नाईक ने कहा कि अगर एनआईए चाहे तो मुझसे मलयेशिया में भी पूछताछ कर सकती है। मनी लांड्रिंग के ईडी के आरोपों पर नाईक ने कहा कि मेरे पास सिर्फ एक बैंक खाता है। बताते चलें कि एनआईए ने नाईक और उसके संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) के खिलाफ धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने के लिए आतंक रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया है। 

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