भारत से जुड़े आंकड़े
93% - भारतीय नींद की कमी के शिकार
20% - बढ़ गया है नींद से जुड़ी थैरेपी का बाजार।
58% - भारतीयों का काम नींद की वजह से हुआ प्रभावित।
बेडरूम में इंटरनेट है वजह
अमेरिका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के मुताबिक एक-तिहाई लोगों का कहना है कि वे रोजाना भरपूर नींद नहीं ले पाते। ब्रिटेन में 93 प्रतिशत घरों में अच्छी इंटरनेट सेवा है, जिससे लोग देर से सोते हैं। शोधकर्त्ताओं का यह भी कहना है कि बैडरूम का डिजिटलाइजेशन होना एक चिंता की बात है। खासतौर से इससे बच्चों की नींद प्रभावित होने की आशंका ज्यादा है और इसका सीधा प्रभाव उनकी पढ़ाई पर पड़ता है। इकोनॉमिक बिहेवियर एंड आर्गेनाइजेशन जर्नल में छपे शोध में यह सामने आया है कि 13 से 30 साल के लोगों को सोशल मीडिया ज्यादा पसंद है। 31 से 59 साल के लोगों को इंटरनेट पर सर्च करना ज्यादा पसंद है।
इंटरनेट का बाजार
- इंटरनेट उपयोग में भारत दूसरे नंंबर पर
- 50 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्त्ता हैं भारत में
- 29.5 करोड़ शहरी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं
- 75 करोड़ के करीब उपयोगकर्त्ता चीन में।
इस शोध से साफ पता चलता है कि आधुनिक युग में खराब लाइफ स्टाइल को बढ़ावा बड़े पैमाने पर मोबाइल की वजह से मिल रहा है। युवा और बच्चे भी नींद से जुड़ी कई तरह की बीमारियां और मानसिक रोग से ग्रसित हो रहे हैं। इसलिए मोबाइल से रात में ब्रेक लेना भी आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा ताकि आप नियमित नींद ले कर तरोताजा रहें और स्वस्थ रहें।