प्रदर्शन स्थल में जत्थों में किसानों ने अपना घर बना रखा है तो कुछ किसानों ने अस्थाई लाइब्रेरी भी बना रखी है। लाइब्रेरी स्थापित करने वाले सुखविंदर अमर उजाला से कहते हैं, हम कुछ लोग अपनी रुचि के अनुसार किताबें लेकर प्रदर्शन में आए थे। किताबों को देख लोग हमसे पढ़ने के लिए मांगने लगे।
सभी दोस्तों की किताबों को एक जगह एकत्र करके अस्थाई लाइब्रेरी बना दी। इसमें ये शर्त रखी है कि कोई भी व्यक्ति किताब लेकर कहीं नहीं जाएगा। यहीं बैठकर किताबों को पढ़ेगा। इनमें करीब 50 किताबें हैं। इनमें फ्रीडम मूवमेंट, गद्दर मूवमेंट, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद और सिख धर्म के इतिहास जैसी किताबें शामिल हैं।
युवा किसान रैली से निकल कर रहे सामानों की सप्लाई
किसान आंदोलन में बुजुर्ग से लेकर युवा किसान सभी की बराबर की जिम्मेदारियां बटी हुई हैं। युवा किसानों को एक जत्थे से लेकर दूसरे जत्थों तक सामान पहुंचाने के काम में लगाया गया है। ये युवा किसान अपने ट्रैक्टर और बाइक पर सामान लाद कर जत्थों में खाने और पीने का सामान पहुंचा रहे हैं।
किसान बलजीत सिंह अमर उजाला से कहते हैं, 'हमें जत्थों के प्रमुखों की तरफ से निर्देश मिलता है कि कुछ जत्थों में सब्जियां, फल, पानी और दूध ज्यादा है इसे दूसरे जत्थों में पहुंचा दो। इसके लिए हम अपनी गाड़ियों में सामान को लोड करते हैं। फिर जिन भी जत्थों में सामनों की कमी होती है, सप्लाई कर देते हैं। इन कामों के लिए एक टीम तैनात कर रखी है जो ये देखती है कि कहीं भी किसी भी सामान की कमी नहीं पड़े जैसे ही कुछ होता है वे हमें सूचित करती है। हम गाड़ियों से लेकर सामान देने निकल पड़ते है।'