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सुबह-शाम नारों में और दिन किताबों में गुजार रहे हैं युवा किसान, रात को तैयार करते हैं अगले दिन की रणनीति

Sat, 05 Dec 2020 09:35 PM IST
मुकेश कुमार झा राहुल संपाल, नई दिल्ली
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
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सिंघू बार्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में रोज नए रंग देखने को मिल रहे हैं। आंदोलन में किसानों के साथ बड़ी संख्या में हरियाणा और पंजाब के युवा छात्र भी पहुंच रहे हैं। ये छात्र सुबह और रात में तो प्रदर्शन में शामिल होते हैं। वहीं दोपहर के तीन से चार घंटे अपनी पढ़ाई में जुट जाते हैं। कुछ छात्रों ने जत्थों में एक अस्थाई लाइब्रेरी भी बनाई है। बार्डर पर जुटे ये सैकड़ों छात्र रोज रात को दिनभर के प्रदर्शन की समीक्षा करते हैं और अगले दिन के आंदोलन की रणनीति भी तय करते हैं।

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हिंदू कॉलेज सोनीपत के बीए के छात्र साहिल ने अमर उजाला को बताया कि,'आंदोलन के दूसरे ही दिन से हम लोग अपने ग्रुप के साथ यहां मौजूद हैं। सुबह के दौर में किसानों के साथ चर्चा होती है। इसके बाद पंडाल में बारी बारी से युवा छात्र आकर किसानों के बीच अपनी बात रखते हैं। किसान संगठनों के नेता भी यहां पर अपनी बात रखते हैं। शाम को फिर किसानों से चर्चा होती है। रात को हम सभी छात्र खाना बनाने और लंगर सेवा में जुट जाते हैं। इसके बाद बाॅर्डर पर बनी सभी छात्रों की अस्थाई कमेटी की एक बैठक होती है। इसमें हम दिनभर के कामों की समीक्षा करते हैं। इसमें ये भी देखते हैं कि आज हमने क्या खराब किया और कल हमें क्या क्या करना है।'


कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के एलएलबी के छात्र अंकित अमर उजाला को बताते हैं, 'दोपहर में डेढ़ बजे से शाम साढ़े चार बजे तक का समय आमतौर पर फ्री होता है। अधिकांश किसान भोजन बनाने और लंगर सेवा में लगे होते हैं। वहीं कुछ आराम भी करते हैं। इस बीच हम छात्र लोग भी अपने अपने टेंट या जत्थों में जाकर अपनी पढ़ाई निपटा लेते हैं। इसके बाद शाम से दोबारा प्रदर्शन में जुट जाते हैं।'
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अस्थाई लाइब्रेरी में भगत सिंह और सिख धर्म का इतिहास पढ़ रहे हैं युवा किसान

प्रदर्शन स्थल में जत्थों में किसानों ने अपना घर बना रखा है तो कुछ किसानों ने अस्थाई लाइब्रेरी भी बना रखी है। लाइब्रेरी स्थापित करने वाले सुखविंदर अमर उजाला से कहते हैं, हम कुछ लोग अपनी रुचि के अनुसार किताबें लेकर प्रदर्शन में आए थे। किताबों को देख लोग हमसे पढ़ने के लिए मांगने लगे।

सभी दोस्तों की किताबों को एक जगह एकत्र करके अस्थाई लाइब्रेरी बना दी। इसमें ये शर्त रखी है कि कोई भी व्यक्ति किताब लेकर कहीं नहीं जाएगा। यहीं बैठकर किताबों को पढ़ेगा। इनमें करीब 50 किताबें हैं। इनमें फ्रीडम मूवमेंट, गद्दर मूवमेंट, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद और सिख धर्म के इतिहास जैसी किताबें शामिल हैं।  

युवा किसान रैली से निकल कर रहे सामानों की सप्लाई
किसान आंदोलन में बुजुर्ग से लेकर युवा किसान सभी की बराबर की जिम्मेदारियां बटी हुई हैं। युवा किसानों को एक जत्थे से लेकर दूसरे जत्थों तक सामान पहुंचाने के काम में लगाया गया है। ये युवा किसान अपने ट्रैक्टर और बाइक पर सामान लाद कर जत्थों में खाने और पीने का सामान पहुंचा रहे हैं।

किसान बलजीत सिंह अमर उजाला से कहते हैं, 'हमें जत्थों के प्रमुखों की तरफ से निर्देश मिलता है कि कुछ जत्थों में सब्जियां, फल, पानी और दूध ज्यादा है इसे दूसरे जत्थों में पहुंचा दो। इसके लिए हम अपनी गाड़ियों में सामान को लोड करते हैं। फिर जिन भी जत्थों में सामनों की कमी होती है, सप्लाई कर देते हैं। इन कामों के लिए एक टीम तैनात कर रखी है जो ये देखती है कि कहीं भी किसी भी सामान की कमी नहीं पड़े जैसे ही कुछ होता है वे हमें सूचित करती है। हम गाड़ियों से लेकर सामान देने निकल पड़ते है।'
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