लोकसभा अध्यक्ष को उनके पद से हटाने का विपक्ष की तरफ से लाया गया प्रस्ताव खारिज हो गया, वहीं पीएम मोदी ने एक बार फिर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसदीय संचालन के लिए उनकी तारीफ की है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तरफ से पीएम मोदी को आभार भी जताया गया हैं। पढ़ें...
संसद के बजट सत्र के प्रथम चरण के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की तरफ से उन्हें इस पद से हटाए जाने का प्रस्ताव लाया गया था। जो बजट सत्र के दूसरे चरण में सदन में ध्वनिमत से खारिज हो गया। वहीं इससे पहले पीएम मोदी ने राजस्थान के कोटा में वहां के सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की जमकर तारीफ की और उन्हें शानदार सांसद और बेहतरीन लोकसभा अध्यक्ष बताया था। इसके बाद प्रधानमंत्री की तरफ से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा गया था।
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ओम बिरला ने पीएम मोदी का जताया आभार
वहीं, अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनके पत्र के लिए आभार जताया गया है। सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में ओम बिरला ने लिखा- माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, आपका पत्र प्राप्त हुआ। भारत के संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति आपका हमेशा अटूट विश्वास रहा है। आपका पत्र लोक सेवा के उन उच्चतम नैतिक मूल्यों को व्यक्त करता है, जिन्हें आपने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में जिया है; वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में तथा इससे पूर्व गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में। आप सदैव संसद की मूल प्रकृति - संवाद, तर्क और विचार-विमर्श में गहरा विश्वास रखते हैं। आप संसद में उठने वाली प्रत्येक आवाज को लाखों भारतीय नागरिकों की आवाज के रूप में सम्मान देते हैं। आप हमेशा संसदीय कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और संसद में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे का समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सशक्त नैतिक आधार को और सुदृढ़ करेगा। आपके प्रेरणादायी शब्दों के लिए हार्दिक आभार।
विपक्ष ने ओम बिरला पर क्या लगाए थे आरोप?
बता दें कि, विपक्ष ने कहा था कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और कांग्रेस के सांसदों को लेकर कुछ गलत दावे भी किए। इसी वजह से कई विपक्षी दलों के नेताओं ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव दिया था। नियमों के अनुसार, प्रस्ताव दिए जाने के बाद ओम बिरला ने खुद को कार्यवाही से अलग कर लिया है और कहा था कि प्रस्ताव पर फैसला होने के बाद ही वह फिर से सदन की कार्यवाही संभालेंगे।