इस वर्ष उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षा में 7.97 लाख छात्र हिंदी विषय में फेल हो गए। इसके पहले 2019 में भी दसवीं और बारहवीं के लगभग 10 लाख छात्र हिंदी में फेल हो गए थे। इसके पूर्व 2018 में भी लगभग 11 लाख छात्रों को हिंदी विषय में असफलता का सामना करना पड़ा था।
कंप्यूटर के उपयोग में अंग्रेजी भाषा की प्रमुखता से यह संदेश गहराई तक गया है कि अगर रोजगार पाना है, तो उसके लिए अंग्रेजी का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। यह कुछ हद तक सच भी है। लेकिन यह भी सच है कि अब बदलाव के दौर में हिंदी भाषा में भी रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं बन रही हैं।
सभी सरकारी विभागों में हिंदी अधिकारी का होना, सभी जगहों पर सबसे अधिक हिंदी अनुवादकों की नियुक्ति होने के साथ-साथ सबसे ज्यादा हिंदी अध्यापकों की नियुक्ति उसके रोजगारपरक होने का प्रमाण है।
इसके अलावा बदलाव के दौर में हिंदी सिनेमा, मीडिया, स्क्रिप्ट राइटिंग, आरजे, वॉयस ओवर (Voice Over) आर्टिस्ट के रूप में हिंदी भाषा से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। अंग्रेजी भाषाओं की फिल्मों के हिंदी में हो रही डबिंग में वॉयस ओवर आर्टिस्ट लाखों रुपये प्रतिमाह तक कमा रहे हैं।
गूगल और अमेजन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी अपना उत्पाद बेचने के लिए हिंदी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं की महत्ता पहचान रहे हैं। यह बदलाव भी इस बात का प्रमाण है कि अब रोजगार के संदर्भ में भाषाई बाध्यता बड़ी बाधा नहीं रहने वाली है। लेकिन इसके लिए युवाओं को हिंदी की उचित समझ, उचित डिग्री और उच्चारण में शुद्धता होना बेहद आवश्यक है।
इस वर्ष घोषित परीक्षा परिणाम में दसवीं कक्षा के 5,27,866 लाख छात्र हिंदी में फेल हो गए। जबकि 12वीं के 2,69,960 लाख छात्र हिंदी में असफल हुए। दो लाख 39 हजार छात्रों ने हिंदी विषय की परीक्षा छोड़ दी थी। इसके पूर्व 2019 में 9,98,250 छात्र हिंदी में असफल हुए थे। जबकि 2018 में 11 लाख से अधिक छात्र हिंदी विषय में फेल हो गये थे।