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Yoga Day: जेएनयू में खूब चमकी योग की पढ़ाई, आईएएस की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच खूब लोकप्रिय हो रहा योग

सार

जेएनयू में योगाचार्य डॉ. अजय कुमार शास्त्री ने अमर उजाला को बताया कि वे 1998 में इस संस्थान में आ गए थे, लेकिन उस समय लोगों को योग को लेकर बहुत रुचि नहीं थी, लेकिन समय के साथ उन्हें योग का महत्त्व समझ आया और लोग इससे जुड़ते चले गए।
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जेएनयू में योगाचार्य डॉ. अजय कुमार शास्त्री। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में योग शिक्षा की पढ़ाई खूब लोकप्रिय हो रही है। 1998 में केवल आठ छात्रों के साथ जेएनयू विश्वविद्यालय में यौगिक साइंस की पढ़ाई शुरू हुई थी। तब इसको लेकर छात्रों में विशेष आकर्षण नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे छात्रों की रुचि बढ़ती गई। आज जेएनयू में आयुर्वेद के साथ एक विषय के रूप में लगभग 250 छात्र यौगिक साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच भी यह बहुत लोकप्रिय है। योग से उन्हें तैयारी के दौरान एकाग्रता हासिल करने और इंटरव्यू के दौरान अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने में मदद मिलती है।  

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जेएनयू की वाइस चांसलर प्रो. शांतिश्री डी. पंडित ने अपने कार्यकाल में संस्थान में यौगिक साइंस की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए हैं। उनके इस प्रयास का नतीजा है कि जेएनयू के परिसर में प्रतिदिन 2200से भी अधिक लोग योग की कक्षाओं में शामिल होते हैं। इसमें यौगिक साइंस की पढ़ाई कर रहे छात्र, शिक्षक, सपोर्टिंग स्टाफ और अन्य लोग शामिल हैं। 

जेएनयू में योगाचार्य डॉ. अजय कुमार शास्त्री ने अमर उजाला को बताया कि वे 1998 में इस संस्थान में आ गए थे, लेकिन उस समय लोगों को योग को लेकर बहुत रुचि नहीं थी। लेकिन समय के साथ उन्हें योग का महत्त्व समझ आया और लोग इससे जुड़ते चले गए। 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद इसकी जबरदस्त लोकप्रियता बढ़ी। जब संयुक्त राष्ट्र से योग को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में मनाने की सहमति मिल गई, तब लोगों ने इसे बिल्कुल अलग तरीके से देखना शुरू कर दिया। 
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डॉ. अजय कुमार शास्त्री के अनुसार, जब लोगों को यह पता चला कि कई गंभीर बीमारियों का इलाज केवल योग से ठीक किया जा सकता है, तब ऐसे लोग भी जेएनयू की योग क्लास का हिस्सा बनने लगे जो औपचारिक रूप से इसकी पढ़ाई नहीं कर रहे थे। शास्त्री के अनुसार, कुछ लोग जो वैचारिक तौर पर यौगिक साइंस से सहमत नहीं थे और प्रारंभ में इसका विरोध कर रहे थे, बाद में वे भी यौगिक कक्षाओं में आने लगे। इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक और कुछ छात्र तक शामिल थे। यहां तक कि जब अपने बच्चों से मिलने के लिए छात्रों के अभिभावक जेएनयू आते हैं, तब वे भी इसमें खुलकर हिस्सा लेते हैं। विश्वविद्यालय परिसर में योग प्रशिक्षण की कक्षाएं लेने पर कोई रोक नहीं है। कोई भी इसमें आकर शामिल हो सकता है। 

आईएएस वाले छात्रों में लोकप्रिय
यूपीएससी के माध्यम से आईएएस बनने का सपना पालने वाले छात्रों के बीच यौगिक साइंस खूब लोकप्रिय हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण तो यही है कि इससे उन्हें एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई करने में मदद मिलती है। योग से छात्रों में जबरदस्त आत्मविश्वास का संचार होता है। इससे उन्हें अपनी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिलती है।

यूपीएससी में छात्रों को अपनी रुचि का विषय़ भी बताना होता है। छात्र यौगिक साइंस को अपना मनपसंदीदा विषय बताकर इसके बारे में ज्यादा बताने में सहूलियत होती है। इस कारण भी वे योग की कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। साथ ही साक्षात्कार के दौरान अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से रखने में भी योग से उन्हें सहायता मिलती है। यही कारण है कि जेएनयू के छात्रों के बीच यौगिक साइंस खूब लोकप्रिय हो रहा है।  

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