गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी
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साल 2021 में मोदी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का पद संभाल रहे अजय मिश्र टेनी अपने काम से ज्यादा विवादों के लिए चर्चा में हैं। अजय मिश्र टेनी पर एक के बाद एक आरोप लगते गए और बुरी तरह वह फंसते गए। 3 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी के तिकुनियां में अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र टेनी के काफिले ने बेकाबू कार से किसानों को रौंद दिया था। इसमें आठ से ज्यादा किसानों की मौत हो गई। हालांकि, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी ने इस कांड में बेटे आशीष मिश्र उर्फ मोनू की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा गाड़ी में नहीं मौजूद ही नहीं था। मंत्री अजय मिश्र ने कहा कि किसानों की तरफ से फेंका गया पत्थर ड्राइवर को लग गया था। इसी वजह से एसयूवी असंतुलित होकर किसानों की भीड़ में जा घुसी। इस घटना के बाद यूपी समेत पूरे देश में सियासत गरमा गई।
विपक्ष दलों के दबाव के आगे पुलिस ने आशीष मिश्र टेनी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने गाड़ी से कुचलने के आरोप में जेल में डाल दिया। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों समेत किसान संगठनों ने अजय मिश्र टेनी से मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की और केंद्र सरकार से उन्हें बर्खास्त करने का आग्रह किया, लेकिन अजय मिश्र टेनी ने इस्तीफा नहीं दिया और ना ही केंद्र सरकार ने भी उनसे मंत्रालय नहीं छीना। इसी बीच मंत्री अजय सिंह टेनी का एक वीडियो भी वायरल हो गया, जिसमें मंत्री टेनी मीडिया से बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार यूपी विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण वोट बैंक के लिए अजय मिश्र टेनी पर कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती है। कुल मिलाकर कहे तो साल 2021 के लिए विवादों से भरा रहा।
महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त भूचाल मच गया जब तत्कालीन गृहमंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख पर सौ करोड़ रुपये की उगाही करने का मामला सामने आया। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख पर अधिकारियों से 100 करोड़ रुपये महीने की वसूली का आरोप लगाया था इसके बाद अनिल देशमुख ने गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए गए। सीबीआई को अपनी पड़ताल में देशमुख के खिलाफ कई संगीन आरोप मिले। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर अनिल देशमुख आ गए। कुछ समय बाद ही देशमुख को कोर्ट में पेशा किया गया, जहां उन्हें जेल में भेज दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 4.20 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। वहीं चांदीवाल आयोग ने अनिल देशमुख पर पचास हजार का जुर्माना ठोक दिया। अनिल देशमुख के लिए यह साल बेहद ही कठिनाइयों भरा रहा। साल की शुरुआत से ही वह विवादों में फंस गए और आखिरी साल तक वह जेल के अंदर ही हैं।
साल 2021 में असम में भाजपा की सरकार आने के बाद हेमन्त बिस्व सरमा राज्य के मुख्यमंत्री बने। भाजपा ने उनकी अगुआई में विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान किया। हालांकि, भाजपा की ओर से सीएम पद के लिए उनका नाम नहीं खोला गया था। फिर भी राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि हेमंत बिस्व सरमा के सिर पर ही असम का ताज सजेगा और उन्होंने 10 मई 2021 को असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हेमंत बिस्व सरमा कुछ दिन पहले ही कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। कांग्रेस से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले सरमा असम में भगवा ओढ़ कर कमल को सींच रहे हैं। हेमंत बिस्व सरमा को भाजपा का पूर्वोत्तर का चाणक्य भी कहा जाता है। क्योंकि इन्हीं की बदौलत भाजपा असम से लेकर पूरे पूर्वोत्तर में फर्श से अर्श तक पहुंची है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
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पुष्कर सिंह धामी का नाम तो आप सब जानते ही होंगे। अगर कुछ लोग नहीं जानते हैं तो आइए हम उन्हें बताते हैं कि आखिर 46 साल का युवा नेता आखिर उत्तराखंड का मुख्यमंत्री कैसे बन गया। पुष्कर सिंह धामी ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि साल 2021 उनके लिए इतनी बड़ी सौगात लेकर आएगा। पुष्कर सिंह धामी 4 जुलाई 2021 में उत्तराखंड के 11 वें मुख्यमंत्री के तौर पर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री हैं।
पुष्कर सिंह धामी विधानसभा में कुमाऊं क्षेत्र की खटीमा सीट की नुमाइंदगी करते हैं और दूसरी बार यहां से चुने गए हैं। पुष्कर धामी को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का करीबी माना जाता है। जब भगत सिंह कोश्यारी मुख्यमंत्री थे तो पुष्कर धामी उनके ओएसडी हुआ करते थे। पुष्कर धामी ना तो राजनीतिक रूप से अनुभवी हैं, और नहीं सरकार चलाने के लिए उनके पास प्रशासनिक अनुभव है। फिर भी पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उनको मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा दांव खेला है। वहीं, मुख्यमंत्री धामी ने भी पार्टी से वादा किया है कि वह अगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा को भारी मतों से जीत दिलाकर सरकार बनाएंगे।
बेंगलुरु से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या साफ छवि की राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन 2021 में उनका एक बयान ने तहलका मचा दिया। 25 दिसंबर को कर्नाटक के उडुपी में श्रीकृष्ण मठ में 'हिंदू पुनरुद्धार' कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां पर तेजस्वी सूर्या ने मुसलमानों और ईसाइयों से हिंदू धर्म में धर्मांतरण का आह्वान किया। तेजस्वी सूर्या ने इन समुदाय के लोगों से घर वापसी करने की अपील की। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद भाजपा सांसद सूर्या ने अपना भाषण ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, "कर्नाटक के उडुपी में श्रीकृष्ण मठ में 'हिंदू पुनरुद्धार' पर बात की। 2014 के बाद भारत अंततः 70+ वर्षों के औपनिवेशिक हैंगओवर के बाद खुद को संभाल रहा है। विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा शासित सदियों के बाद भारत 'विश्वगुरु' के रूप में फिर से उभर रहा है।" हालांकि, अपने भाषण पर विवाद बढ़ता देख सूर्या ने तत्काल अपना बयान भी वापस ले लिया। तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट किया कि बिना शर्त वह अपना बयान वापस ले रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा
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अभिषेक बनर्जी का नाम भी साल 2021 में चर्चा में रहा। कोल स्कैम को लेकर अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा सीबीआई और ईडी के रडार पर रहे। कोयला माफिया से संपर्क होने के कारण इसी साल अभिषेक बनर्जी को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया था। लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें छोड़ दिया था। अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बड़े भाई अजित बनर्जी के बेटे हैं। अभिषेक बनर्जी डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद हैं। पश्चिम बंगाल में कहा जाता है कि वो ममता बनर्जी 'दीदीट के लाडले हैं। ममता बनर्जी आने वाले समय में पार्टी में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुश नहीं हैं।