यशवंत सिन्हा ने केन्द्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीति दोनों पर करारा प्रहार किया। सिन्हा ने कहा कि भाजपा में रहते हुए हर कोई डरा हुआ है। इसलिए कोई कुछ नहीं बोल रहा है, लेकिन वह नहीं डरते।
अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार की आंकड़े बाजी पर भी गंभीर सवाल उठाया। इससे पहले सोमवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पर भी केन्द्र सरकार को आड़े हाथो लिया था। सिन्हा ने कहा कि नेशनल फोरम एक राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि मंच है। यह सरकार की ऐसी नीतियों के खिलाफ लगातार अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि एक तरफा फैसला लेना देश के लिए खतरनाक है। इसलिए अब देश में मुद्दों पर बातचीत और बहस होगी।
राष्ट्र मंच क्या है
राष्ट्र मंच को लेकर यशवंत सिन्हा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने इसे राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित एक बहस और चर्चा का मंच बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं है। न ही यह किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर के नीचे काम करेगा। 80 साल के यशवंत सिन्हा ने स्पष्ट किया कि उनकी कोई राजनीतिक महात्वाकांक्षा नहीं है। खुद के उनके शब्दों में कि कोई उन्हें चाहे जो कहे लेकिन वह अपने कर्तव्य से नहीं भाग सकते। गौरतलब है कि इससे पहले कश्मीर के मुद्दे से लेकर आर्थिक मुद्दे तक यशवंत सिन्हा अपनी बेबाक राय रख चुके हैं।
उन्होंने नोटबंदी के निर्णय की खुली आलोचना की थी और जीएसटी के लागू करने के तरीके पर भी सवाल उठा चुके हैं। तब प्रतिक्रिया में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उनपर बेरोजगार होने का तंज कसा था। यशवंत सिन्हा झारखंड और महाराष्ट्र में भी मुद्दों को उठा चुके हैं। वह बताना चाहते हैं कि उनके मंच को किसी राजनीतिक दल के पक्ष में या किसी के विरोध में देखने की बजाय इसे राष्ट्रीय हित में आंदोलन करने वाले संगठन के रुप में देखा जाए।
यशवंत सिन्हा के राष्ट्रीय मंच पर शत्रुघ्न सिन्हा की मौजूदगी को लेकर शत्रुघ्न ने भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि यहां आना और राष्ट्र मंच में शामिल होना कोई पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं है। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि उन्हें भाजपा में रहकर अपनी बात रखने का कोई मंच नहीं मिल पा रहा था। इसलिए वह राष्ट्रीय मंच से जुड़े हैं। शत्रुघ्न सिन्हा के अनुसार उनके इस कदम को भाजपा विरोधी गतिविधि के रूप में न लिया जाए।
बढ़ाया दबाव
एक फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली संसद भवन में बजट 2018-19 पेश करेंगे। वैसे भी इस साल आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 2019 में कई राज्यों के साथ-साथ आम चुनाव प्रस्तावित है। ऐसे में, केन्द्र सरकार के आखिरी पूर्ण कालिक बजट को पेश करने से पहले पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने राष्ट्र मंच का गठन कर दिया है। यशवंत सिन्हा ने साफ किया है कि वह सरकार के एक तरफा और मनमाने फैसले के खिलाफ अपना राष्ट्रीय दायित्व निभाएंगे। किसानों के हक के लिए लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन उनका यह मंच किसी राजनीतिक पार्टी के न तो खिलाफ है और न ही किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर तले काम करेगा। यानी गैर राजनीतिक संगठन होकर सरकार द्वारा लिए फैसले का राष्ट्रीय में विरोध करेगा। लोगों के हक के लिए आंदोलन करेगा। इससे साफ है कि एक तरफ जहां वह केन्द्र सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ और मुखर होंगे, वहीं सरकार के खिलाफ एक माहौल भी खड़ा होगा।