केरल में बदलाव की लहर शुरू हो चुकी है। अभी तक दलितों को मंदिरों के दरवाजे तक नहीं पहुंचने देने वाले दक्षिण भारत के मंदिरों में शिव मंदिर का पुजारी एक दलित बन गया है। यादु कृष्णा ने सोमवार को जब शिव मंदिर का दरवाजा खोला तो वो उसका सपना पूरा होने जैसा था। पुलाया समुदाय के 22 वर्षीय कृष्णा एक दलित हैं। यादु केरल के पथनमथिट्टा जिले के कीचेरिवल मंदिर के पुजारी बने हैं।
कृष्णा उन छह दलित पुजारी में से एक हैं जिन्हें तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध त्रावणकोर देवस्वम मंदिर बोर्ड ने अलग-अलग मंदिरों में पुजारी के तौर पर नियुक्त किया है। यह पहली बार है कि जब केरल के मंदिर में दलित और पिछड़े वर्ग के पुजारियों को मौका दिया गया है और आरक्षण प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
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कृष्णा ने बताया कि वह पिछले पांच सालों से एर्नाकुलम जिले के वलियाकुलंगारा देवी मंदिर के पुजारी रहे हैं और उन्हें किसी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा है। कृष्णा ने आगे कहा कि जब वो सोमवार को जब मंदिर से आ रहे थे तो कई श्रद्धालु भावुक हो गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के कमिश्नर सीपी राम राजा प्रेमा प्रसाद ने कहा कि नए पुजारियों को मंदिर का काम शुरू करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। अब लोगों की सोच में बहुत बदल चुकी है। अब लोगों का सोचना है कि पुजारी को पूजा कराना आना चाहिए, मंदिर का रख-रखाव अच्छा होना चाहिए अब उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह किसी जाती का है।